मैं देश नहीं बिकने दूंगा मैं देश नहीं झुकने दूंगा !
【बेचना : देश की सरकारी संपत्ति को देश के ही धनपतियों को बेचना बेचना नही है बल्कि सुरक्षित हाथों में बेहतरी ओर उच्च सेवा कर्म के लिए अच्छा है , हां विदेशी हाथों में बेचना नाजायज है..इस निर्णय डील में ऐसा कुछ नहीं है, देश 90 फीसदी राजकर्मचारियो के कामकाज ओर जनसेवा में कोताही से त्रस्त है!】
हां बेचूंगा लेकिन अपने ही लोगो को
I mean देशजनों को ही बेचूंगा
वहां कोई लालफीताशाही नहीँ
कोई ऑफ़सरशाही नही
कोई भाई-भतीजावाद नही
कोई सिफारिश नहीं कोई घूस नहीं
न अगड़ा न पिछड़ा सब बराबर
न आरक्षण- बारक्षण
पहली बात तो कोई शिकायत का मौका ही नहीं
ओर भौतिकता-प्राकतिकता के चलते आ जाय कोई कमी
BSNL, बिजली विभाग,नल विभाग ,रेलवे की तरह नहीं
की घण्टी पर घण्टी बजे पर कोई उठाये नहीं
वरन तुरंत हलचल ओर हल -निवारण
सोचो निजी महकमो की जरूरत क्यो पड़ी
क्योकी ये विभाग सुन्न हो गए अपने मद में
सेवा नहीं सैलेरी इनका मकसद हो गया
तो फिर क्या बस काम की ललक,उत्साह हो
ओर कागजी नही व्याहारिक गुणवत्ता
यानी सब सम बराबर
ओर त्वरित सेवा कोई विलंब नहीं
ओर कोई स्थायित्व नही नोकरी में
जो निकम्मे ,घूसखोरी , भ्रष्टाचार का बड़ा कारण
कोई एम्प्लोयी यूनियन नही
बस जन सेवा उत्तम सेवा
ओर आप मुझ पर इल्जाम लगाते हैं
की अम्बानी को बेच दिया अडानी को बेच दिया
यानी तथाकथित दोस्तो को बेच दिया
अरे भाई और किसी की औकात भी तो होनी चाहिए न खरीदने की
अब जय शाह को न थोड़े बेचूँगा
बेचारा अभी अभी हज़ार से करोड़पति बना है
बिज़नस हूनर ओर तिकड़म की चुनर से
ओर भाई विजय माल्या जैसे को तो बेच नही सकता न
कल देश को चुना लगा विदेश भाग जाएगा
बात रही टाटा-बिड़ला की तो वो व्यापारी नही
घराने हैं, खानदानी उद्दोगपति
जैसा कि अभी एक साक्षात्कार में रतन टाटा जी ने बताया था
वो खरीदते नहीं वो कुछ नया कर
अपने एम्पायर को उसी ऊंचाई पर रखते हैं
ओर देखिए बेचने का मतलब बेचना नही
ये लीज पर कुछ खास संवैधानिक शर्तो पर है
यदि काम,सेवा सही नही,
देशहित में नही मसौदा ख़ारिज
हां ठीक उस रात 12 बजे की घोषणा जैसा
की आज से नहीं अभी से आपका अनुबंध खत्म
टाटा राम राम बाय बाय आवजो
◆ NK सनातन