~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

100 फीसदी हो आरक्षण

**100 फीसद हो आरक्षण!**
योग्यता के पैमाने पहले जातिगत थे
अब भी जातिगत ही बने घड़े अड़े पड़े हैं
लोकतंत्र में आरक्षण का सर्पिण्डन ओर ढेरो का उत्थान और उत्पीड़न
एक तरफ 90 वालो का चयन नही
ओर दूसरी तरफ 40 वालो का उपनयन
कोई डॉक्टर कोई इंजीनियरिंग
कोई कोई आईएएस कोई आईपीएस कोई आईएफएस
आरक्षण की आग ओर पवन यज्ञ में
कई लील रहे हैं तो कई पल फल फूल रहे हैं
आरक्षण का ये जादुई अस्त्र अपढ़ कोई सांसद कोई विधायक कोइ पंच प्रधान बन रहे हैं
योग्यता पानी भर रही ओर औसत राज कर रहे हैं
इस तरह पढ़ो पर अनपढ़ शासन कर रहे हैं
लोकतंत्र की ये त्रासदी बहुमत में काग राज कर रहे हैं
सत्ता सुख भोगने ये क्या नियम घड़ रहे हैं
जिसे कम्पाउंडर बनना था डॉक्टर अधीक्षक बन रहे हैं
जिसे कंडक्टर बनना था दादे कलक्टर बन रहे हैं
आरक्षण के नाम देश मे अयोग्य अधिकारी राज शाह बढ़ रहे हैं
मेरी विनती मेरी आह की ये धतंग ये स्वांग छोड़ो
है अब यही सुरत तो इसे पूरा बना सजा दो
देश मे अब 50 नही 60 नही पूरा 100 फीसद
हां पूरा शत प्रतिशत आरक्षण थोप दो
ताकि अशेष आशा आकांक्षा ही न धरे
न आंदोलनों में देश जले ओर रहे सब हरे हरे
एक अम्बेडकर हुवे जो बिन आरक्षण जनरल हुवे
ओर इतना जनरल ओर सभ्रांत शिष्ट की
सब उच्च जन उद्देलित विचलित हुवे
सनद रहे -2
प्रतिभाऐ जाति धर्म आरक्षण की मोहताज नही रहती
देखे खिलने वाले कमल कीचड़ में ही खिलते
नेसर्गिक प्रतिभाएं निर्बाध अबाध बढ़ती हैं
वो आरक्षण की कभी मोहताज़ नही रहती हैं
सही मायने गर देखे-2
आरक्षण की मांग असक्षम करते हैं
हैं आप प्रतिभाशाली तो -2 “सनातन” की इस दलील से-
सच्चो को एतराज नही!
*N K सेवक “सनातन”