*** ****** हठ -ताल********
(लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत हड़ताल जायज है!)
हड़ताल एक तरह से हठताल शब्द निशब्द
देशज भाषा मे हडकाया एक सशक्त शब्द
हां कुत्ता जब पागल हो जाये काटने दौड़ता
जिसे ग्राम जन कहते सावधान
है हडकाया
हड़ताल में भी कुछ ऐसा जिसमे यूनियन फंडा
ओर संगठन नेताओ का बड़ा दबदबा
हड़ताल कहां तक जायज हैं एक कौंधता सवाल
लोकतांत्रिक मूल्यों में हक़ के लिए
अहिसंक प्रदर्शन
हां देश जन प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार
लेकिन हड़ताल एक तरह से है अप्रत्यक्ष
हाँ अपरोक्ष अप्रत्यक्ष हिंसक अनाचार
जिसे अंग्रेजी में न्याय संजय झुमला
इमोंशनल अत्याचार और हिंदी में भावात्मक अतिशयता
हड़ताल से देश को कितना नुकसान
हड़ताल से सेवाधर्मिता प्रभावित पीड़ित
अफ़्सोस न हो ऐसा अधिकार जिससे कार्य प्रभावित हो
देश जन परेशान हो हड़तालीयो को कोई हक नही बनता
लेकिन ये परंम्पराये निर्बाध चल रही हैं
संगठन के बल सरकार पर दबाव बनते हैं
ओर माह दो माह के प्रदर्शन जिससे भारी नुकसान
ओर सरकार अन्तोगत्वा झुकती है
भई जब मानना ही है तो देश को इतना नुकसान दे कर क्यो
ओर हड़ताल नजायज नाजायज़ अनर्गल
सरकारे भराये बांड की आपको ये सारी शर्ते मंजूर है
ओर पूरे सेवा काल के कभी न ये काम करेंगे
ओर करे तो तत्काल सेवा से पृथक सरकार का सवैधानिक अधिकार हो
ओर सरकार पूर्व ही समयानुसार कर्मचारियों से न्याय करे
लेकिन हड़ताल से ज्यादती ओर सरकार तो देर सवेर झुकनी ही।
चाहे इस तानाशाही राजशाही कानून कह दे
लेकिन आम जनता और देश हित मे है मेरी दलील ये तय है
प्राइवेट ओर निजी संस्थानों में भर्ती हो नियम बेकायदा
ओर वेतन भी हो राष्ट्रीय नियमानुसार
जिन निजी संस्थाओं की औकात नही-2
तत्कालीन प्रभाव से आदेशित सरकार उन्हें बन्द कर दे
ताकि सबके साथ न्याय और समता का सिद्धांत पुख्ता हो।
*N K सेवक “सनातन”