~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

From Sanatan's Writing Blog

प्यार मन फव्वारों की फुलझड़ी !

☆ 🫑 धरातलीय प्यार का आसमान 🫑 ☆

विधा: पोएम / प्रोज़ा

क्षेत्र: प्यार

~~■~~~

 

प्यार प्यार प्यार

मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत

इक रूहानी आवाज़

ग़ायब का खिंचाव

कि चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण भी फीका

 

क्या प्यार दो इक-सी

चाहतों का नाम है?

क्या ये जिस्म से उठता है

या रूहों से उठता है?

क्या जिस्मानी मिलन प्यार को मज़बूत बनाता है

या दो रूहों की आवाज़ इक पूजा बनाता है!

 

●● प्यार मोहब्बत का आईना



●●

 

सौ में से निन्यानवे प्रतिशत प्यार दिल की आवाज़ और मन की आसमानी तरंग से उठते हैं और दो प्रेमी एक-दो बदन, एक जान बन उस सुरमयी सुगंधित आसमान में झूमते हैं, लेकिन इस कड़ी में सौ में से 99.99 प्रतिशत – प्रतिशत एक अनुमान है, पुख्ता तथ्य नहीं, लेकिन मेरे आंकलन और दृश्य आईने में ये एक सटीक आंकड़ा है – औंधे मुंह गिरते हैं, यानी सफल नहीं होते। सफल नहीं होने के कारण बेवफ़ाई शून्यतम भाग में होती है, बनिस्बत सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, जातीय, धार्मिक, राजनीतिक, मनोवृत्ति और कुछ छद्म और छुपे हुए कारक और कारण इसके पीछे होते हैं। और दरअसल जिसने भी उस आसमान को छुआ यानी मोहब्बत की, बेवफ़ा नहीं होता-होती! प्यार प्यार है, प्यार जब भी होता है सच्चा ही होता है, मगर हाँ परिस्थितियाँ उसे सफल-असफल, वफ़ा-बेवफ़ा बना देती हैं, लेकिन टूटे-जुड़े प्यार के अफ़साने ऊपर चित्रगुप्त के रजिस्टर में दर्ज हो अमर दास्तां में परिवर्तित हो जाते हैं। प्यार की पूर्णता असफलता की श्रेणी में, नश्वरता की श्रेणी में है। अधूरा या असफल प्यार अमरता की श्रेणी में होता है, जिसमें बार-बार मिलने का सन्मार्ग युगों-युगों तक चलता है।

 

इस कड़ी में मशहूर बॉलीवुड फ़िल्म ‘मिलन’ (1963) का मशहूर और कालजयी गीत जिसके बोल इस तथ्य या सत्य को पुख्ता करते हैं और वो प्रेम कहानी भी साक्षात चित्रपट पर बयां करते हैं –

 

“हम तुम युग युग से ये गीत मिलन के गाते रहे हैं, गाते रहेंगे

हम तुम जग में जीवन साथी बन के आते रहे, आते रहेंगे

जब जब हमने जीवन पाया, जब जब ये रूप सजा सजना

हर बार तुम्हीं ने ये मांग भरी, तुमने ही पहनाए कंगना,

हम फूल बने या राख हुए पर साथ नहीं छूटा अपना,

हर बार तुम्हीं तुम आन बसे, इन आँखों में बनके सपना,

जग ये बंधन ना तोड़ सका, हम तोड़ के हर दीवार मिले

इस जनम जनम की नदियां के इस पार मिले उस पार मिले।”

 

गीतकार – श्री आनंद बख्शी, संगीतकार – कल्याणजी-आनंदजी; डायरेक्टर – अदुर्ति सुब्बा राव, निर्माता – एल. वी. प्रसाद; पार्श्वगायन – युगल मुकेश जी – लता जी, हालांकि ये पुनर्जन्म पर आधारित फ़िल्म है और पुनर्जन्म के कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं। हाँ, भारतीय पौराणिक शास्त्रों में इसका उल्लेख है और अमूमन भारतीय पुनर्जन्म अवधारणा में विश्वास रखते हैं!

 

*इस धरती पर सौ में से निन्यानवे फीसदी विवाह बंधन – तय या अरेंज्ड, प्रेम या गंधर्व, समझौता या कानूनन – अयुग्मक या बेमेल (unmatched) होते हैं, हाँ तन-चेहरा-रंग-मन या स्वभाव कहीं कोई युग्म या संगत नहीं, लेकिन सामाजिक बंधन और शारीरिक, आर्थिक, मानसिक, संतति सुख और निर्वाह की समरसता, कर्तव्य, भय, इज्जत, साख के लिए विवशता के साथ या साथ के लिए विवश संग के नाम या नाम के संग गुज़ार लेते हैं। कहने को दोनों – स्त्री-पुरुष – अनेकों शिकवा, शिकायतों के पुलिंदे होते हैं, जो बता होकर भी अव्यक्त होकर भक्त बने रहते हैं।

 

*मेरा निचोड़ यही कि ये संसार, ये प्रकृति, ये ईश्वर दया-क्रूरता, सुख-दुःख, प्रकृति संतुलन से चलायमान है, जो हमें ग्राह्य या स्वीकार होकर भी स्वीकार है क्योंकि इसका कोई तोड़ नहीं है, बस चाहे-अनचाहे स्वीकारना ही है!

 

☆ प्यार शारीरिक आकर्षण या स्वाभाविक मन-मंदिर, पारदर्शी आँखों बोलती का खिंचाव ☆

 

प्यार का धरातल क्या है! प्यार झूठा दिखावा हो सकता है क्या?

नहीं, प्यार प्यार है। शरीर हासिल करने के लिए प्यार का दिखावा किया जा सकता है, लेकिन प्रतिपक्ष इस बात को चेहरे-मोहरे या स्वभाव-व्यवहार से भांप सकता है, सकती है! कहीं प्यार मज़दूरी भी होती है, जैसे व्यावसायिक, सामाजिक, आर्थिक! लेकिन दो दिल भी मज़बूर होते हैं कि दिल मानता ही नहीं, बस खिंचा दौड़ा जाता है और वो दिल की मज़बूरी, मीठी स्फुरण भरी रोमांचक होती है कि धरती पर ही स्वर्ग महसूस होने लगता है! प्यार का निचोड़ शादी नहीं होना चाहिए! तो क्या होना चाहिए? हाँ, दो प्रेमी जोड़े को इक खूबसूरत मोड़ पे राज़ी-खुशी छोड़ अमरता के नाम कर अगला जन्म है तो फिर मिलेंगे और अवश्य मिलेंगे कभी, क्योंकि अधूरे प्रेमी जोड़े को ऊपर वाला अवश्य मिलाता है!

 

💐😢–

प्यार का तराजू

 

प्यार दुनिया की सबसे सस्ती चीज़

तब जब किसी को किसी से अनायास हो जाता है

और जब खो जाए, यही प्यार दुनिया की सबसे महंगी चीज़

 

प्यार किया नहीं जाता

ये तो ऊपर

की आवाज़ बन उठता है

मचलता है अंतर्मन में

आसमाँ की आवाम बन कर

 

प्यार की उम्र आँधी की तरह

कि उठता है अंधड़

कि दोनों दिल झूमते आँखों ओझल

 

जैसे ही आँधी कमज़ोर होती

सांसारिकता आड़े आ ज़ोर दिखाती

मचलते अरमान टूटते

दुनिया की आंधी में धूमिल बह जाते हैं

 

लेकिन जो अडिग धाम लेते, पांव ज़मीन में

बांहों में बाहें डाल सिमट

जाते हैं

और होश में आते ही तोड़ ज़मीन का –

कि सामाजिक, धार्मिक बंधन, रस्मों-रिवाज की शादी रच-रचा ली जाती है।

 

जो पड़े थे पीछे, घर-परिवार-परिजन, दुनिया वाले, समाज के ठेकेदार

सबकी त्यौरियां चढ़ी थीं, सहम जाती हैं, ठहर जाती हैं। प्रश्न सारे अनुत्तरित हो हँसते हैं उन पर!

 

निचोड़ ये “सनातन” की

प्राकृतिक हुक, ललक से उठ रूमानी, रूहानी,

सामाजिकता यानी कि सांसारिकता में रम-रच-बस खो जाती है!

 

🩷🩷❣️ सुकून-ए-मोहब्बत पर खयाल-ए-सनातन 🩷🩷

 

मोहब्बत की दुनिया में बेवफ़ाई का प्रतिशत बहुत ज़्यादा है

आपके नसीब में यदि वफ़ा के किस्से हैं तो आप बड़े खुशनसीब हैं!

 

अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का

यार ने ही लूट लिया घर यार का

ये ऐसा इसलिए हुआ कि यार की नहीं कमी, तेरे ही एतबार में थी या सांसारिकता की ऊंचाई में!!

 

मोहब्बत में मोहब्बत पे गर लूटने की फ़ितरत है

यकीन मानिए तब गृहस्थ में किसी तकरार की जगह नहीं है!!

 

मोहब्बत में जो वफ़ाओं का हिसाब रखते हैं

बेवफ़ाई तब जल के राख हो जाती है

ढूंढती है तब एक नया चेहरा, जहाँ वो तबाही मचाती है!!

 

मोहब्बत में सनम को बुत बना दो

खुदाई खुद बोल के सजदा करेगी

कि प्यार खुद काफ़िर बन जाएगा

परस्तिश सनम की कि मन-मंदिर में सज के बैठ तुम्हारी कायनात झूम जाएगी

मन मगन उसकी धुन में, रोज़-ब-रोज़ प्रसादों की थाल परोसी जाएगी

यूँ ज़िंदगी सुरमयी

बहार बन जाएगी!!

 

★ अशआर-ए-आशना ★

उपर्युक्त उद्धृत खयाल-ए-मानिंद कुछ भटकते शेर एन. के. सनातन की जानिब से

 

💐 मोहब्बत के जहान में आजकल धोखा ज़ियादा है,

जो तुमको मिली उल्फ़त, तो तुम खुशकिस्मत हो।

 

💐 लुटाया आशियां उस पर जिसे अपना यार माना था,

मेरा प्यार यार ले उड़ा, ख़ता मेरे ही मिज़ाज की थी?

 

💐 जहाँ पर एक-दूजे पे ही मिटने की धुन हो,

फिर उस आँगन में तकरार की क्या जगह हो!

 

💐 वफ़ा की रोशनी में जल जाती है बेवफ़ाई,

तबाही के लिए ढूँढती है फिर वो नया चेहरा।

 

💐 सनम को बुत बनाकर ज़हन-ए-मंदिर में बैठाया,

तब खुदाई ने भी आकर खुद सर अपना झुकाया था!

 

💐 ज़माना अब मुझे काफ़िर कहे तो कोई परवाह नहीं,

परस्तिश में सजदे की हर कोई काफ़िर बनने को लालायित है।

 

💐 सुबह-ओ-शाम अब तो आस्था की थाल सजती है,

56 भोग से अलग-अलग स्वाद के – ज़हन में जन्नत सी महफ़िल सजी है!

 

NK Sanatan