आग है तू ओर रहेगा क्योंकि
तू धरती का मानव आक्सीजन लेता है
और कार्बनडाइआक्साइड देता हूँ
जाहिर है आग जलाने ओर बुझाने का हुनर -2
मानव तुझमें नैसर्गिक होता है
बस कहा जलाना है कितना याद रख
बुझाने को वो सब काली चीज़ बुझा-2
सिवाय कस्तूरी , केश, मेघ ओर अंधेरा
क्यो ,क्योंकि —
एक खुशबू-अमृत का प्रतीक
एक चेहरे पे सुंदरता का हबीब
दूजा पयोधर धरती की हरियाली ओर जीवन
ओर चौथा उजालो के लिए जद्दोजहद ओर भटकन के बाद
शान्ति के लिए बहुत जरूरी-2
हाँ काला घना अंधेरा आखरी पलो का मीत।
*NK सेवक “सनातन”