सर्द मौसम के नम खयाल

सर्द मौसम के नम खयाल

अगर दुनिया में ऊपरवाले ने मौत मुकर्रर न की होती प्राणी की
तो न डर न भय न भूख न नोकरी पेशा न पूजा अर्चना की जरूरत पड़ती
जानवर तो बेचारे बिना पूजा पाठ अर्चना अजान के जिंदा है
आदमी बहुत शाणा शर्तिया अपनी दानवीय सोच की सोच से
ईश्वर को फिर कभी न मानता
ये तो डर हैं जनाब श्रद्धा के नाम
खेमे के लोगो द्वारा नमो नमो भजा जपा जाता है

*Nk सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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