चुभे काँटो को भी मेरा सज़दा!

चुभे काँटो को भी मेरा सज़दा!

चुभे कांटो को भी मेरा सज़दा
चुभे कांटो से भी फ़लसफ़ा मिला*
कांटो ने भी उतना ही दिया-2
जितना उन गुलो-फूलों ने दिया
उम्र के गुजरे दौरों का हिसाब
किया
तो कहूँ कांटो-शूलों ने भी कम न दिया
ज़ाहिर है फूल कम कांटे ज्यादा
महरबान वो दर्द भी हुवा
की जिंदगी का सबब प्रचुर मिला
तो उन कांटो का भी शुक्रिया
के जिन्होंने फूलों से ज्यादा
हाँ फूलों से भी ज्यादा
फ़लसफ़ा जिंदगी का दिया
कांटो ने जिंदगी के राज जिंदगी के तेवर सिखाये
ज़हर पीना तो पीना पचाना भी सिखाया
फ़लसफ़ा या के जीवन दर्शन इतना ही छूपा कांटो की सेज में
जितना है फूलों के बागों बहारो की शे में
निचोड़ यही की यहाँ भौतिक और व्यावसायिकता के बोलबाले
हाँ ज्यादा बहुत ज्यादा हैं
और जिंदा रहने के लिए किसी को मारना जरूरी है
ये इस नश्वर संसार का एक अघोषित नियम औऱ सच है
ओर कहावत भी पुख्ता यहां-2
बड़ी मछली छोटी मीन का शिकार करती है
शेर भी निरोहो ओर सबलो को भी घेर -घार कर ताक़तवर को -2
संगठित प्रयास और बाहुबल से अशक्त बनाते हैं
लेकिन शेर ढेरो भेडियो के समक्ष पीठ दिखाते हैं
यानी वक्त वक्त की बात
की कि जो था वहां सशक्त
असहाय हो पीछे हट जाता है
भौतिक जीवन का सच
इस बात की सूक्ष्मता बारीकी देखे
इस कड़वे सत्य में ही
की जरूरी नहीं -2
कि आप मांसाहारी या निरामिष हैं
शाकाहारी के भी बस ऐसे ही आईने हैं
क्यो क्योकि शाकाहारी भी देखो
फूल-फल,पत्तियां, बीज-धान्य पीसाते-उबालते ,काटते
हत्या वहां भी है फिर क्यों अघाते
हाँ फर्क बस इतना-2
एक प्रत्यक्ष हिंसा
एक मे अप्रत्यक्ष हिंसा
इसे यूं समझे
शाकाहार भोजन खेल है जिसमे दो भिड़ते-लड़ते हैं
लेकिन खून नहीं बहता
और एक युद्ध या जंग
जिसमे सीधा खून बहता है
मौते होती हैं
एक मे शारीरिक दूजे में मानसिक जैविक हत्या है
जो महान पौध शास्त्री
जगदीश चन्द्र बसु के थ्योरम में साफ स्पष्ट है !
*nk सेवक ”सनातन”

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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