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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

मैं धृतराष्ट्र लेकिन आँखोंवाला

मैं धृतराष्ट्र लेकिन आँखोंवाला

मैं आँखोंवाला धृतराष्ट्र समस्या सहल बोल रहा हूँ

( देश की गिनाई जा रही समस्याओं पर एक व्यंग्यात्मक चित्रण )
【 सरकार प्रमुख ओर उनका राष्ट्रीय उद्बोधन 】

आये दिन सुनता हूँ देश अस्थिर है , असंतुलित है , सारी व्यवस्था चरमराई ओर गाल मेल वाली है।
अरे भई समस्याएं किसके नही होती । अब आदमी जिंदा है है तो समस्याएं तो होंगी ही । अब आदमी मर गया तो समस्या जिंदा आदमी को ही है कि उसे ठिकाने लगाना है अंतिम संस्कार के नाम । अंतिम संस्कार कोई नही करता यदि लाश में बदबू नही आती। चलो ये दर्शन शास्त्र है … इस पर फिर कभी चर्चा करेंगे।
अब मैं सुनता हूं कि
की देश अस्थिर,असंतुलित हो गया है ,हिंसा- प्रतिहिंसा ,चोरी ,डकैती ,बलात, आंदोलन, धरने ,मार्च ,रेल रोको …
अरे भई ये नया थोड़ा है..
1954 में एक मूवी बनी नास्तिक जिसमे गीत था — देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान कितना बदल गया इंसान…
अरे भई मेरी डिग्री पर कितनी ही अंगुलयाँ उठाओ लेकिन बाल यू ही सफेद नहीं किये हैं अनुभव तो है 70 साल
पांच निकाल देना क्योकि तब मैं ना समझ था ..ये इसलिए साफ कर रहा हु की मैं विपक्ष को बोलने का मौका देना नही चाहूंगा क्योकि ये ऐसे नुस्ख जरूर निकालेंगे..

अरे भाई पहले हमारे बाप -माँ कहाँ इतने पढ़े -लिखे थे लेकिन ज्ञान हमसे ज्यादा..
तो मुझे बाप समझो … मेरा मतलब उस अर्थ में नही …

देश मे महंगाई महंगाई
महंगाई महंगाई महंगाई….
अरे भई ये क्या मख़ौल बाजी बना रखी है… विपक्ष ने…
अरे तुम्हे सत्ता चाहिए तो ऐसे ही ले लो…..
हम तो वैसे भी रमता जोगी..
झोला उठाया और चल दिये….. लेकिन याद रखना कटोरा थमा के जाऊंगा..
लेकिन सत्ता हथियाने लोगो को गुमराह तो न करे …..
कहाँ है महंगाई..
मनोज साब ने फ़िल्म बनाई 1971 में
“रोटी कपड़ा मकान”
अरे उसमे मंहगाई मार गयी…..
यानी महंगाई तब थी
अभी होती तो कोई एक आद फ़िल्म जरूर बनती
लेकिन नहीं बनी है तो जाहिर है मंहगाई नही है ।
आप विपक्ष के लोगो ने युही बवाल बना रक्खा है
याहोल बिला क़ूवत..
छि छि देश के लिए ये ठीक नही..…
ऐसी विषैली राजनीति ठीक नही धिक्कारता हूँ मै ऐड़ी रीति -प्रकुति को..
ओर भाई हम सब घर गृहस्थी वाले लोग हैं..
माफ करना ….मेरा नही है…
लेकिन आप सबका है
मैं तो अब तक संघ कार्यालयों , संघी मित्रो के वहा खाता-पीता आया हूँ इसलिए आटे-दाल -चावल का भाव नहीं मालूम
मित्रो मैं जानता हूं ये विपक्षी यहां पीता का अर्थ दूसरा लगायेंगे लेकिन
जय बागा जय नट्टू काका …जैसी जिसकी सोच….
लेकिन हाँ आप मेरे देश के महान नागरिक हैं उन्हें ये ज्ञान , अनुभव है मित्रो….इसलिये मैं परवाह नहीं करता ….
अब मित्रो* शब्द से लोग घबराने ,सहमने लगे हैं..
कुछ तो इसे भारत का सबसे खतरनाक शब्द करार देते हैं..ओर कुछ तो ये कहते हैं कि मोदी ने इसे पेटेंट करवा लिया है…
खेर जाने दो ….यार …
नही यार नही ये काका राजेश खन्ना साब का शब्द है वो स्वर्ग से आपत्ति करेंगे ओर मैं उनकी इज्जत करता हूं
मैं कोई ऐसा काम नहीं करता जिस पर कोई आपति करे !
हाँ तो मैं महंगाई पर बात कर रहा था…. वैसे मैं जब भी करता हूँ मन की बात करता हुं लेकिन आज आपकी बात कर रहा हु की महंगाई अब है तो है । यदि आप इस मामले को तूल देना ही चाहते हैं तो ठीक है कोसो..

बहनों-भाइयो वास्तव में ये राष्ट्रीय समस्या है इसे हम मिल-झुल कर खत्म कर सकते हैं। कैसे….? हाँ मित्रो मैंने इस पर गहन मन्थन किया है रात को…वैसे नींद ठीक से आती नहीं क्योकि शादीशुदा कुंवारा हूँ और ऊपर से बावजूद शादी के बाल-बच्चे भी नही हैं…
। खेर ये मेरी निजी समस्या है राष्ट्रीय नहीं.. जिसका अब कोई सोलुशन नही …
हां तो महंगाई है तो इसे कैसे निबटे..
दोस्तो गेस मंहगी हो गयी …नही गेस महंगी कहाँ हुई है लोग अच्छा खासा खा रहे हैं और भली-भाति निकल रही हैं यानी आप स्वस्थ हैं क्योकि आपके शरीर के सारे पुर्जे भली भांति काम कर रहे हैं …
दोस्तो ये मैं विपक्ष कि बात कर रहा हु एक बार नही हर बार गलत अर्थ में सींचते है…
खैर गेस सिलेंडर की बात
थीं जो 800 ₹ के पार ….. तो भाई क्यो यूज करते हैं… इसे छोड़ो ! जैसे कइयों ने देश हित मे सबसिडी छोड़ दी
आप केरोसिन भट्टी, स्टोव नही आप जंगल की लकड़ी को यूज़ करे ।
इधर -उधर रोज लकड़ी इकट्ठा करो जैसे हमारे देश के ग्रामजन करते है इससे महान पारम्परिक परम्परा जिंदा रहेगी
गेस सिलेंडर से भयंकर हादसे हो सकते हैं । गेस सिलिंडर फट सकता है । घर जल सकता है ! आप, आपके जल -मर सकते हैं
यदि मैं गृहस्थी होता तो लकड़ी -चूल्हा बाप- दादो वाला ही प्रयोग करता
ओर गाय को पालो इससे गोबर ,गोबर गैस , उपले- कंडे,खाद ,दूध और मरने के बाद भी कमाई करा जाएगी.
खेर गेस सीलेंडर समस्या तो देखो हाथो हाथ हल हो गयी ….बस जज्बा चाहिए
अब जरा आगे चलते हैं
पेट्रोल -डीजल महंगा
अरे भाई कहां महंगा हुवा है हां बड़ा हुवा है यानी विकास हुवा है । हमेशा बढना चाहिए । हम कम में विश्वास नही करते। जो कम में विश्वास करते हैं भारतीय नहीं हो सकते। खेर डरो मत डीएनए चेक नही करूंगा क्योकि इसमे हमारे कई लोग भी लपेटे में आ सकते हैं ….
देखो 370 फितर CA विऐ हमने निपटाया के नही निपटा
निपटाया…..
अरे भाई पेट्रोल 50-60 ₹ होता तो कहा रुतबे की बात होती । अरे भाई हम भारतीय इतने गए बीते हैं क्या बोलो नहींन तो
लगना चाहिए बोलने में की 100 रूपये यानी जेठालाल की तरह वट पड़ना चाहिए
अब टाटा साब ने नैनो लांच की की सब भारतीयो के पास कार हो कि बड़ी सोच से । मगर हुवा क्या सस्ती थी स्टेटस पॉइंट बना इतनी सस्ती ओर बन्द कर दी क्योकि वैल्यू नही की सस्ती चीज का..
ओर नहीं तो छोड़ो ये दोपहिया चारपहिया गाड़ी- घोड़े इससे एक्सीडेंट की संभावना खर्चा ज्यादा ध्वनि वातु प्रदूषण फिर टैफिक जाम समय ईंधन की बर्बादी टोल टैक्स वैक्स इसलिए
बस पेदल चलो
या ऊंट गधा घोड़ा बेल भैसा वैसे भी हैं हैं किस लिए । बेचारे नाराज हैं कि टेक्नोलॉजी ने हमे नकारा कर दिया ओर काम नही आ रहे तो भूखे मर रहे हैं । मालिक पाल कर चारा पानी नहीं दे रहा शहर में आवारा छोड़ रहा । जंगल मे छोड़े तो बात बने पर जंगल अब हैं कहा….?
अरे भाई हम आपके हैं कोन ! मित्र हैं आपके,
हमारा उपयोग करो
ओर खर्चा शून्य….
क्योकि सब घास -फूस, पत्ते कांटे डालिया खाते हैं इसमे एक कोढ़ी का भी खर्चा नही
चलो पेट्रोल डीजल निबट गया.
अब बेरोजगारी
बेरोजगारी कहां है
ओर है तो क्यो हैं
हमारे अमित भाई छोटा भाई कहते हैं ठेला लगाओ आलू राहुल कहते हैं बेचो…. ठीक कहते हैं उन्होंने देश की नब्ज पहचानी है …..
यानी सच्चाई ये की
बेरोजगारी हरगिज़ नही
है ।
लोग खा -पी रहे हैं यानी भूखे नही मर रहे हैं …
खा पी रहे हैं तभी निकाल रहे हैं…
अभी ताज़ा आंकड़े मेरे पास है बतौर सबूत
की देश की— सभी नगरपालीकाओ के द्वारा 40 करोड़ सेफ्टी टैंक खाली किये गए साल में 12 बार यानी हर माह एक…..
तो जाहिर है बेरोजगारी नही है ! देश में विरोधी भाई राजनीति कर रहे हैं । इसमे
हमने सर्वे करवाया –घर पर सिवाय गृहिणी के कोई घरों में नही मिला !
यानी साफ़ है कि कोई भी बेरोजगार नहीं है और विपक्ष झूठा आरोप लगा रहा है भाइयों- बहनों।
अगला मुद्दा जीडीपी (GDP ) अरे भाई ये होता क्या है मुझे आज तक पता नही । मैं ठेठ कला वर्ग का विद्यार्थी रहा हूं मुझे इससे क्या लेना देना ! अब कहा पढ़ा कैसे पढ़ा परीक्षा दी डिग्री आई वो विपक्ष का रोना है । भई मैं मनमोहनसिंह की तरह डॉक्टर और अर्थशास्त्री थोड़े हूं। हमने चिदम्बर जी जैसे को नही रखा क्योकि जानकार आदमी होता है तो खा जाता ,बेटे को रातों रात करोड़पति बना देता है और साला खा जाता तो खा जाता लेकिन दिक्कत ये होती कि खाने नहीं देता। इसलिए हमने निष्णात रघुराजन को विवश किया ओर उर्जित जो अपने स्टेट का था लगया लेकिन हरिश्चंद्र किताब में अच्छे लगते हैं हमने उन्हे भी इस्तीफा दिला दिया। अब वो व्यक्ति रिज़र्व बैंक का गवर्नर है जो इस विषय मे जरा भी नही जानता ओर हमारे सब मुद्दों पर रीजर्व है…
चलो जीडीपी सुलट गया
अब बताओ क्या समस्या है देश की कोई नही शून्य..
अडानी -अम्बानी की संपत्ति तिगुनी हो गयी तो भाई धीरूभाई तो पहले ही अमीर थे हमारे पहले। अडानी गुजराती हैं और गुजराती व्यापार करना जानते है तो संपत्ति बढ़नी ही थी। Zeo को बढ़ाया BSNL को डुबाया। अरे भाई BSNL में काम कहाँ होता था आये दिन वेतन DA पर धरने धमकियां सरकार को फोन पर अभी आप कतार में हैं।
भाई zeo ने कितना सहज कर दिया सब मझे ले रहे हैं।
चलो बचा खुचा जो शिकायत हमसे थी आपकी वो संशय भी दूर कर दिया ।
एक ओर मुद्दा तब्लीग़ी जमात के आका अब तक गिरफ्तार नही हुवे अरे भई सन्त महात्मा हैं कथावाचक थोडे न हैं इसलिए शर्तिया वो ऐसा नही कर सकते और कोरोना के फैलाने का प्रयास तो चीन ने किया पूरे विश्व मे दादा अमेरिका जी ने क्या कर लिया।
हमने ताली बाजवा कर कोरोना को दूर भगाया । इसका हमे अनुभव था वो यू की बचपन ने तपाक कर कई मच्छर मारे तो हमे सपना आया कि ये युक्ति सुझा भोली जनता को इसमे हींग न फिटकरी ओर जीवाणु खत्म। हमने अच्छे खासे पढ़े लिखो से ताली बजवा दि ।हिंदुस्तान की जड़ो में अंधविश्वास ओर इससे बहुत कुछ पाटा जा सकता है ऐसा हमारा विश्वास है। तो मित्रो देश वासियों अंध बने रहो बिश्वास बिखरता रहेगा किश्तों में ही सही लेकिन मिलता रहेगा . !
धनवाद …..!!!!!
*nk सेवक *सनातन*