★माँ अम्बिके त्र्यम्बकी की महाआरती★
[ माँ दुर्गा की शान में मेरे उद्द्गार ]
हे माँ भद्रकाली
हे वैष्णो रानी
हे शक्ति शिवानी
तेरी महीना की क्या विरल कहानी
प्रेम जोगन शिव भक्तन माँ सुहानी
नो नव रूप श्रृंगारी मां भवानी
हम संसारी पाप और भारी तू दिव्यानि
सब की तारणहारी माँ दुर्गा शिव दीवानी
हम सब करे नित नित तेरी आरती
सुख-संपदा , शक्ति -भक्ति,रीति-नीति
प्रदायिनी
हे माँ अम्बे हे जगत जननी जगदम्बे
तू खुद स्तुति क्या करे हम तेरी स्तुति
सीमित ज्ञान, सीमित बुद्धि तू अनंतयिनी
हे मां क्या करे हम तेरी आरती
हम सब कामी तू अंतर्यामी सब कुछ बरसाने वाली
हे मां हम तुच्छ-लघु क्या गुणगान भारती
हे मां पावा-पटरानी ,ओ शिव महारानी
सब रूप धारिणी
हे मां क्या हमारी हैसियत क्या रुतबा
बस नश्वर भक्त जन तार दे तो भवसागर मां शारदीय
हे मां गब्बर वाली है माँ कामाक्षी, मीनाक्षी ज्वाला
हे मां महिषासुर नाशी
हे मां त्रिशूल,खप्पर,डमरू , पद्म गदा चक्रधारी
हे मां महागौरी हे हे माँ बंग महा काली
तेरी जय जयकार
बस भक्ति शृद्धा की है ये फुलवारी
हम भक्त जनों की न्यारी
नवरात्र की मेहमान हम करे नवाज़ी
घट स्थापना गरबा-लास्य ही बस हमारी राग रागिनी
हे माँ मम क्षमाम हम सब करे छोटे मुख तेरी महा आरती!
*nk sevak ‘सनातन”