फ्री(मुफ़्त) हाँ… नहीं ?!

फ्री(मुफ़्त) हाँ… नहीं ?!

रोटी-कपड़ा-मकान!
क्या मुफ्त होना चाहिए ?
रोटी ,कपड़ा,मकान
या फिर
शिक्षा ,न्याय ,इलाज !
ओर क्यो होना चाहिए ?
रोटी ,कपड़ा,मकान जीवन की तीन पुख्ता जरूरते
रोटी पहला
मकान दूसरा
सभ्यता के नाम कपड़ा तीसरा
आदमी पुरखो से जमी- जायदाद अचल संपत्ति का मालिक होता आया है
ओर वारिस के नाम बंटता आया है
इस तरह पीढ़ी दर पीढ़ी
खरीद-फ़रोख़्त का चलन चलता आया है
बात मुद्दे की कि आदमी मेहनत -मजदूरी-श्रम- परिश्रम करता है
नोकरी-पेशा- पैतृक काम- काज ,व्यवसाय कर पेट पालता है
जो अत्यावश्यक है
यानी मुफ्त में रोटी कोई नही जुटाता
भिखारी भी एक्टिंग, लाचारी ,दर -दर भटक कइयों के सामने हाथ फैला-फैला कर अप्रत्यक्ष मेहनत ही तो करता है !
देश मे कुछ भी फ्री नही होना चाहिए
हाँ सबको रोजगार मिलना चाहिए
इस पर सरकार कोई भी हो मनन करना चाहिए
सवाल ये की योग्यता के हिसाब से उसे श्रम मिलना चाहिए
देश मे 5 लाख इंजीनियर की जरूरत
आप डिग्रीयां 30 लाख को दे रहे है
ओर भारी कम्पीटिशन
प्रक्रिया में
हां वरीयता में 25 हज़ार को नोकरी देते हैं
स्पष्ट है 2975000 बेरोजगार हो जाते हैं
सभी काबिल,डिग्रीधारी
लेकिन वरीयता में 25 श्रेष्ठ
अब काश की ऐसा होता
30 मे 20 लाख एक ही वरीयता लाते
तब क्या
लेने तो 25 हज़ार ही थे
असमंजस धर्मसंकट ओर फिर लॉटरी सिस्टम
यही आईना सभी नोकरियों का है
तो सरकार क्या करे
पहली शर्त की वरीयता में नही आने पर-2
बेरोजगार को कोई भी कम कुशल ,अकुशल आंशिक ट्रेनिंग देकर काम दिया जा सकता है
ओर यदि वो शख्स वो काम नही करे तो
उसे बेरोजगार नही माना जाना है
यानी कोई भी बेरोजगारी नही हो
काबिलियत अपनी जगह है
अब एक अनार सो बीमार तो फिर यही सूरत है
सरकार देश ने तीन काम बिल्कुल फ्री यानी मुक्त करने चाहिए
सारे इलाज जिसमे भर्ती-वर्ति, जांच-वांच ,
आपरेशन-फोपरेशन , मेडिसिन-वेडीसीन फ्री
[★नॉट : मेडिसिन-
वेडिसिन ये मेरे विशुद्ध भारतीय होने का प्रमाण है ★]
दूसरा सभी प्रकार की डिग्री -डिप्लोमा देशी- विदेशी शिक्षा फ्री
हाँ विदेशी शिक्षा के लिए अविलक्षण प्रतिभा जरूरी
यानी शुद्ध हिंदी में एक्ट्रॉर्डिनरी या आउटस्टैंडिंग हो तो विदेशी शिक्षा भी फ्री
ओर तीसरा न्याय फ्री नही हो
क्योकि इससे अपराध जगत को बढ़ावा
तो न्याय सशुल्क ही हो
ओर मेरे मत में भारी शुल्क वाला हो
तो अपराध शर्तिया कम हो
लेकिन न्याय यथाशीघ्र नही हो
क्योकि यथा में विलंब की भारी गुंजाइश
सो न्याय प्रक्रिया तुरन्त यानी फ़ास्ट ट्रैक हो
न्याय के लिए वकील की जरूरत न हो
धाराएं कम कर देनी चाहिए
ओर विद्यार्थियों को बुनियादी शिक्षा में ये धाराएं ओर दंड सहिंता समझा देना चाहिए
यानी कक्षा 1 से 12
जिससे बड़ा होकर प्रथमेव वह वो अपराध नही करे
क्योकि वह उसका घनत्व जानता /जानती है
उसका परिणाम भी
ओर भुगतान भी
फिर न्याय प्रक्रिया में अभियोजन ओर ओर अभिभाषक यानी दोनो मुवक्किल ओर मुजरिम में मुवक्किल को सरकार पूरा पैसा मय कृपांक राशि इज्जत सही दे
अंतिम न्याय प्रक्रिया में निरपराध साबित होने पर
ओर…
बाकायदा अखबार में छोटे से छोटे मुकद्दमे के निर्णय या न्याय का
बयान हो बखान हो
खबर हो
पुलिस में अंग्रेजीराज ओर रजवाड़ी राज की राठौड़ी प्रथा खत्म हो
यानी “सनातन ” निचोड़ की केवल शिक्षा फ्री हो
वैसे इलाज भी फ्री नही हो
लेकिन भारत मे कुपोषण
गरीबी ,भुखमरी, असंतुलित भोजन, स्वास्थ के प्रति असजगता
अतः बीमारी स्वाभाविक है
कोई भी जानकार बीमार नही होता
लेकिन यदि देश अतिविकसित हो तो
तो इलाज फ्री नही होना चाहिए
आदमी अपने आप को स्वस्थ रखेगा
व्यसनों से दूर रखेगा
की वह रुग्ण न हो
ओर होगा तो भारी खर्च बैठेगा
जिससे आधा तो वह तुरन्त मर जायेगा
कुछ पैतृक- मातृक ओर महामारी की बात अलग हो
उस पर इलाज बिल्कुल फ्री हो यानी शुद्ध हिंदी में पूर्ण रूप से मुक्त हो!!!!
nk “सनातन “

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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