~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

संवैधानिक कमी और कमझोर लोकतंत्र

” क्यों रखा जाता है MLAs/MPs को सुरक्षित घेरे में हर इलेक्शन परिणाम के बाद ?”

भारतीय संविधान के महान होने की दुहाई देने वाले आज भी पछता रहें हैं और तब भी मणिपुर ,मेघालय ओर गोआ में जो हुवा………!
मैं यहां एक निष्पक्ष भारतीय की हैसियत से अपना मंथन उड़ेल रहा हु… साझा कर रहा हूं…..
अब जबकि
कर्नाटक विधान सभा चुनाव का आईना साफ़ है लेकिन संविधान या आइन का चेहरा धुंधला नही होने से हर चुनाव में यही विकट स्तिथि सामने आती है……..
तब जब किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नही मिलता है….
ऐसे में बहुमत सिद्ध करने सभी दल जोड़-तोड़ के प्रयास करते हैं क्यो————
क्योंकि…. सँविधान में ऐसे आयाम या परते हैं या प्रत्यक्ष रूप से स्वीकारे की इसमे कमियां हैं जो लोकतन्त्र को लचर ओर सवालिया बनाती है…… की ऐसे प्रावधान क्यो घड़े ओर देश के श्रेष्ठ सुधिजनो ने दूरदृष्टि क्यो नही रखी…….?
*बात यू हो रही है
क्यो हो रही है?????????
क्योंकि ऐसी परिस्थितियां इस बार कर्नाटक परिप्रेक्ष्य में ही नही भारतीय चुनावी इतिहास में आमतौर पर कई बार हो चुका है…..!!!!!!!!!!
की BJP सबसे बड़े दल में आई लेकिन आवश्यक बहूमत से 8 सीट्स कम …… उधर कांग्रेस और JD का घोषीत गठबंधन था या नही जो को सविधानिक रूप से घोषीत होना चाहिए था यदि वाकई होता तो …..!!!
लेकिन इसमें संशय है लेकिन देवगौड़ा जी जो देश के अल्पकालिक प्रधानमंत्री रहे हैं और गठबंधन सरकार के तो BJP के विरुद्ध ही जायेंगे….
क्योकि राजनीति और सांसारिक जगत में दुश्मन का दुश्मन तीसरे का दोस्त होता है………!!!!!!!
ओर यही हो रहा है….. लेकिन सबसे बड़े दल को निमंत्रित किया गया सरकार बनाने बहूमत साबित करने लेकिन महामहिम राज्यपाल को ये तो ध्यान करना चाहिये की बीजेपी अकेले दम पर लड़ी कोई गठबंधन नही ओर जो अन्य दो दल है वो आपस मे एकमेव ओर 2 अन्य हैं जो bjp का समर्थन कर सकते हैं लेकिन उनके समर्थन से संख्या 106 बैठती है जबकि ———-
जादुई आंकड़ा—-112
तो राज्यपाल साब को सोचना था कि जोड़-तोड़ यानी अलोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध…. ओर….यदि वो MLAs यदि bjp का समर्थन करते हैं तो अनैतिक ओर अलोकतांत्रिक
मूल्यों का हनन करते हैं और सिर्फ सत्ता सुख हेतु
अपने मतदाताओं के साथ अन्याय करते हैं क्योंकि उन्होंने उन्हें उस बैनर ओर उस विश्वास पर मत दिया था न की इस पार्टी के लिए जिनके विरुद्ध वो खड़े हुवे थे……!!!
खेर अब उन सभी MLAs को घेर कर एक रिजॉर्ट में रोका गया है क्यो….????
क्या पार्टी के नेताओ को उन पर भरोसा नही …
वो टूट उनसे मिल जाएंगे क्यो…??????
जब पार्टी के सदस्य हैं तो उन पर भरोसा होना चाहिए और वो उम्मीदवार भी इतने शसक्त हो नैतिक रूप से की उन्हें कोई लालच कोई शक्ति कोई डर नही तोड़ सकता…
ओर ऐसा ही कि कोई टूट जाये प्रलोभनों शक्ति के आगे तो
सविधान ऐसा कानून बनाये की——
कोई भी किसी का समर्थन न दे और सिर्फ ऐसी दशा में सिर्फ highest बहुमत प्राप्त पार्टी ही सरकार बनाये … जिससे नैतिक पतन की मिसाल
महान हरिश्चंद्र
समुद्रगुप्त
भरत
राम के देश मे
देखने न मिले….
मेरा निचोड़ की ऐसे नैतिक पतन को रोकने सविंधान को मजबूत करना होगा जिससे मतदाताओं की भावनाओं से न्याय हो ओर लोकतंत्र अपनी ऊँचाइयो को छुवे…।
*NK सेवक “सनातन”