*कानून की परिकल्पना ओर प्रादुर्भाव..!
गीदड़ ( भेड़िये ) कल्चर को देख कर कानून निर्माण इक कमज़ोर व्यक्ति के मन मे आया ….
जिसमे 30-40 गीदड़ झुंड में रह एक शेर को आगे-पीछे से परेशान कर शिकार छीन लेते हैं असहाय शेर समझदारी दिखा चला जाता है कि इनसे निबटना मुश्किल है….यानी MIGHT IS RIGHT के सिद्धांत ( जिसकी लाठी उसकी भैस… यानी शक्तिशाली की सत्ता या मर्जी से सब कुछ होना ) ,
इस तरह उस कमज़ोर आदमी ने कई कमजोरों को एकत्र कर ताकत संजोई ओर एक कानून बनाया जिससे एक महा शक्तिशाली उन हज़ार कमज़ोरो के समक्ष क्षीण पड़ गया और आज लोकतंत्र में कोई भी शक्तिशाली अपनी मनमर्जी नही कर सकता क्योकि कानून सबके लिए समान है क्योंकि सारे कमजोरों की ताकत उसमे हैं….. हालांकि अप्रत्यक्ष शाक्तिशाली राज कर रहे हैं और कानून को अपने हिसाब से प्रभावित करते है यानी वहां भी वो कमजोर ( मानसिक- आर्थिक-सामाजिक-शारिरिक ,भौगोलिक , प्राकुतिक रूप से) वर्ग को अपने हथकंडों से उपयोग या प्रभावित कर कानून के दायरे में कानून को आंच आये बिना अपना काम कार्रवा लेते है राज करते हैं …
जैसे– एक कमझोर नेता रिश्वत भृष्ट हो कर कद्दावर
फिर भी कमझोर की वह रिश्वत लेते हैं
सनद रहे एक शक्तिशाली कभी रिश्वत नहीं लेता
जैसे कलेक्टर प्रशासनिक रूप से शक्तिशाली लेकिन मानसिक रूप से कमजोर यदि वह रिश्वत लेता है !
दुनिया मे हमेशा हर काल मे एक शक्तिशाली और एक हज़ार कमज़ोर हुवे हैं चाहे लोकतंत्र हो राज तंत्र हो कुलीन तन्त्र हो, अति तंत्र यानी तानाशाही हो ….। कानून की जरूरत सिर्फ कमजोरों को होती है क्योकि शक्तिशाली में वैसे ही शक्ति होती है !
*NK सेवक “सनातन”