ये अखबार वालों कि ख़बर मे मृगमरीचिका*
[ शीर्षक है रविचंद्रन अश्विन ने बोलती बंद की ]
हैडिंग पढ़ कर तो सीना फूल जाता है और स्कोर देख कर भी गर्व होता है कि अश्विन जो टीम में बतौर मुख्य स्पिनर के रूप में हैं । लेकिन समय पर अच्छी बल्लेबाजी करने की भी काबिलियत उनमें हैं क्योकि प्रारंभ में कर्नाटक के लिए रणजी फॉरमेट में वे सलामी बल्लेबाज रहे हैं। टेस्ट केरियर में इनके नाम पांच सैकड़े इस बात का प्रमाण
हैं ।
निसंदेह वे एक अच्छे आलराऊंडर यानी हरफनमोला क्रिकेटर हैं।
अब मैं मूल बात यानी शीर्षक पर आता हूं जिसमे लिखा है पत्रकार महोदय ने ( राजस्थान पत्रिका दिनांक 16 फरवरी,2021 ) की — बोलती बंद की । किसकी …जाहिर है इंग्लैंड की ओर विशेषकर उनके पूर्व कप्तान माइकल वान जिन्होंने कहा कि पिच पहले ही दिन 5 वे दिन जैसी रफ़ एंड टफ पिच है जिस पर बल्लेबाजी करना मुश्किल है । स्मरण रहे कि भारत ने टॉस जीत कर पहले बल्लेबाजी चुनी ओर ये किस्मत की बात रही । भारत प्रारंभ में कोई अच्छी स्तिथि में नहीँ था और 54 के करीब 4 प्रमुख बल्लेबाज पवेलियन लौट चुके थे । और नवोदित शुभमन गिल ओर प्रमुख बल्लेबाज विराट कोहली , अजिंक्या रहाणे जैसे बिना खाता खोले आउट हो चुके थे। ऐसे में रोहित शर्मा ने एक सिरे से आक्रमण जारी रखा। वो टेस्ट तकनीकी रूप से इतने साउंड ओर मझें हुवे बल्लेबाज न थे कि विकेट पर कलात्मकता ओर धैर्य दिखाते हुवे टीके अतः उन्होंने अप्रत्याशित टर्न ओर उछाल वाली पिच पर अपने स्वभाव और शैली अनुसार आक्रामक खेल दिखाया और एक सिरे से रनों की झड़ी लगाते गए। कुछ माद्दा इन्फॉर्म विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पन्त ने भी दिखाया अर्ध शतक झड़ कर। रोहित शर्मा ने बेमिसाल पारी खेली वो भी 161 रनों की । भारत ने कुल 326 रन बनाए थे जिसमें रोहित का योगदान लगभग 50 फीसदी था। कोई संदेह नहीं कि विकेट खतरनाक था जहां सिर्फ उच्च गुणवत्ता वाला बल्लेबाज ही सहजता से बल्लेबाजी कर सकता था । भारत की पहली पारी के जवाब में इंग्लैंड मात्र 136 पर ढेर हो गया। खैरियत रही कि 10-15 रनों से फॉलोऑन बच गया। टीम इंडिया दूसरी पारी में फिर लड़खड़ाई लेकिन इस बार कप्तान विराट ने जिम्मेदारी निभाते हुवे 62 रनो की पारी खेली। लेकिन मुख्य भूमिका रविचंद्रन अश्विन ने विराट कोहली के साथ 96 रनो की महत्वपूर्ण साझेदारी की। वैसे भी दूसरी पारी शुरू करने से पूर्व ही भारत के पास खोने को कुछ न था । एक बड़ी बढ़त 196 रन यानी इंडिया ड्राइवर सीट पर था क्योकि इंग्लैंड खतरनाक ढंग से टर्निंग विकट पर पहली पारी में मगज 136 पर सिमटा था तो दूसरी पारी में ओर ज्यादा खरनाक विकेट पर 150 से ज्यादा की उम्मीद नहीं कर सकते थे । और ब्रिटिश बल्लेबाज वैसे भी स्पिन गेंदबाजी खेलने में इतने प्रवीण नहीं रहे हैं। चलो भारत ने दूसरी पारी में लगभग पौने 300 रन कूट दिए। इंग्लैंड के गेंदबाज ओर क्षेत्ररक्षक हैरान-परेशान थे । कैच पर कैच छूटे जा रहे थे। गेंदबाज गेंदों में लय की तारतम्यता नही रख पा रहे थे यानी लगातार प्रभावी गेंदबाजी नहीं कर पा रहे थे।
इस भूमिका के माध्यम से मैं अखबार नवीस द्वारा उद्धत शीर्षक या हेडिंग की बात करता हूँ कि बोलती बंद कर दी। अरे भाई रविचंद्रन अश्विन की इस पारी को जरा गौर से देखो । देखो की अश्विन की इस शतकीय पारी में एक नही दो नहीं पूरे 4 जीवनदान थे। इसमे कसूर बेशक अश्विन का नहीं फील्डर्स का रहा लेकिन पत्रकार महोदय द्वारा ये लिखना अतिशयोक्ति है, बेमानी है कि –बोलती बंद कर दी। वो तो ठीक है कि हम उस पारी के गवाह हैं जिसने ये बात नोट की वरना हम तो यू ही गुरुर ऐ इश्क़ करते। यानी निचोड़ यही मेरे इस नॉट का की अखबार वाले चीजो को, विषय-वस्तु को तोड़-मरोड़ कर अतिशयोक्ति पूर्वक मसाले में अतिरिक्त तड़का लगा कर विषय-वस्तु परोसते हैं जो हकीकत के धरातल से दूर होती है। खेर यहां रविचंद्रन अश्विन की पारी की तारीफ़ करता हूँ की उन्होंने बिंदास ओर बेबाकी से खेला क्योकी परिस्थितियां उनके अनुकुल थी ओर उन्होंने उसे भुनाया। उन पर जरा भी दबाव नहीं था इसलिए वो मुक्त हस्त खेले । जीवनदान उन्हें मिलते रहे वो भी चार यानी किस्मत महरबान थी। हिंदी में कहावत है कि ख़ुदा महरबान तो गधा पहलवान यानी जब किस्मत तेज़ होती है तो सारी परिस्थितियां आपके पक्ष में अपने आप बनती है रहती हैं । और यही तथ्य रवि के पक्ष
जाता है और रवि के पक्ष में भी यही हुवा। क्षमा करे कि बात में तथ्य रखने हेतु मैंने इतब निकृष्ट उद्धरण प्रस्तुत किया है लेकिन जाहिर है अश्विन के लिए नहीं। ये सिर्फ तथ्य को स्पष्ट करने वाली भारतीय कहावत है।यहां बात सिर्फ किस्मत की कि है और हम जानते हैं किस्मत भी जाबाज़ों का साथ देती है। मैंने पढ़ा है कि टेस्ट क्रिकेट की सबसे तेज शतकीय पारी सर विवियन रिचर्ड्स की जो उन्होंने मात्र 56 गेंदे खेल कर इंग्लैंड के विरुद्ध धमाका किया था। उस समय वेस्टइंडीज बड़ी सुखद ओर मजबूत स्तिथि में थी । तो विव ने आते ही आतिशी शुरू की ओर प्रहार पर प्रहार करते गए। उस मैच में किस्मत ओर हास्यात्मक पहलू ये रहा कि विव के मिस टाइम स्ट्रोक भी सीमा पार ओर ऊपर जा रहे थे । ऐसा नही की विव सक्षम नही थे लेकिन बात किस्मत की कर रहा हूं ।आज क्रिकेट की बुक में इस ज्वालामुखी पारी को विशेष स्थान प्राप्त है।
खैर लिखते -लिखते मैच का परिणाम आ चुका है और भारत एक बहुत बड़े अंतर से मैच जीता है और श्रृंखला में 1-1से बराबरी कर ली है। शेष दो मुकाबले ओर हैं जो चेन्नई चेपौक से मोटेरा अहमदाबाद में खेले जाएंगे। विश्वास पहले ओर दूसरे मैच की तरह मुकाबले एक तरफा नहीं होंगे। मैच जब कांटे की टक्कर में खत्म होता है तो क्रिकेट उन्नत होता हैं और दर्शक वास्तविक रूप से मनोरंजन प्राप्त कर करते हैं – यानी पैसा वसूल। हमने देखा ऑस्ट्रेलिया में बॉर्डर-गावस्कर सिरीज में कुछ मुकाबले बड़े रोचक रहे। अभी बांग्लादेश-वेस्टइंडीज के दोनों टेस्ट दांतो तले उंगली दबाने वाले रहे। पाकिस्तान-साउथ अफ्रीका का पहला मैच एक तरफ़ा लेकिन दूसरा टक्कर का रहा। हार-जीत खेल का अभिन्न अंग है लेकिन हमेशा खेल जीते बस तभी खेलो की सार्थकता स्वयम सिद्ध होगी।
मुकाबले टक्कर में खत्म हो तो ही मैच का मझा आता है। अब देखे इंग्लैंड ने साढ़े तीन दिन ने ही घुटने टेक दिए। भारत जीता लेकिन बतौर दर्शक इतना मजा नहीं आया क्योकि मुकाबला निहायत ही एक तरफा था !
*NK सनातन