हमारा देश जो भारत था और है ओर मुग़ल, अफगान जो आक्रांता बन भारत मे शासक हुवे कारण कुछ भी रहे लेकिन समय के साथ वो भारतीयता में ढल-रम-बस गए और गंगा-जमना, दजला-फ़रात , सिंधु -नील की संस्कृति एक दूजे में सराबोर हो घुलमिल गयी। मुग़लों ओर अफ़ग़ानों ने सिन्धु घाटी के हम महान ओर समृद्ध निवासियों को हिन्दू कहा और ये शब्द समय के साथ बलवती ओर वैदिक सभ्यता ओर संस्कृति का प्रतीक बन गया जो आज तलक जारी है। काल के साथ अंग्रेज भारत आये व्यापारी बन ओर देश छत्रपों की आपसी फूट का फायदा उठा यांत्रिक ताकत से शासक बन बैठे और इस जहरीले -अपच माहौल ने हिन्दू-इस्लाम के नुमाइंदों को एक कर दिया और 1857 में प्रथम साझा गदर का सूत्रपात हुवा… हालाँकि गदर असफ़ल रहा लेकिन गंगा-जमनी एके की शुरुआत हुई । गदर केवल निजी स्वार्थों को लेकर लड़ा गया और इसमें आम भारतीय का योगदान शून्य था लेकिन इस विद्रोह या बलवे ने आम भारतीयो को एक होने की तरफ आकृष्ट किया। जुल्म अफ़ग़ान-मुगलो-तैमूरो -चंगेजो-लोदियों-गोरियो-ग़ज़नवीयो ढाये लेकिन अंग्रेजो की मार या जुल्मों ने मकदूनिया के वाशिंदों यानी मामा शकुनि के कंधार-अफगानों -मुगलो को भारत का वासी बना दिया ।
ओर तदन्तर दोनो ही जाति के लोगो ने अंग्रेजों के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी ओर अन्ततः 15 अगस्त,1947 यानी 200 वर्षो की क्रूर गुलामी से निज़ात पाई।
*विद्यार्थी अकादमिक स्तर पर इतिहास के ये पन्ने उलटते हैं और अवगत होते हैं इस महान आज़ादी की संघर्ष गाथा से।
*आज हमारा देश ( हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई-जैन-बौद्ध-पारसी सबका ) आज़ादी की 73 वीं वर्षगांठ मना रहा है। समारोह की दृष्टि से 74 वां स्वाधीनता दिवस…
आज आज़ादी के मायने बदल गए हैं…. जीवन को बचाना प्रमुख लक्ष्य रह गया है क्योंकि हम सब एक दुष्कर महामारी के विषम दौर से गुज़र रहे हैं… ..
सारे समीकरण उलट गए हैं…
लाखो लोगो की जान लील चुका है कोरोना देश-विदेश में….
ऐसे में इस स्वत्रंत्रता दिवस पर हम अपने मूलभूत अधिकारों से इतर मूल कर्तव्यों या नीति-निर्देशक तत्वों पर गौर करे और एक पूर्णरूपेण जिम्मेदार नागरिक बन खुद को ओर देश जनो को कोरोना संक्रमण से बचाये…
यदि हम ऐसा कर पाए तो ये आज के स्वत्रंता दिवस को बड़ी दीर्घ ओर कीमती भेट होगी…
सभी देश-जनो को nk sevak “सनातन” की जानिब से स्वाधीनता दिवस वर्षगाँठ पर हार्दिक बधाईयां ओर शुभकामनाएं…
*nk सेवक “सनातन” की कलम से