***” सचिन तेंदुलकर… एक क्रिकेटर से एक किवदंती !” ***
( जन्म दिवस 24 अप्रैल पर हार्दिक हृदयोद्गार)
+स्वरचित
नरेश कुमार सेवक
” सनातन”
* यू तो हुवे हैं क्रिकेटर्स कई सिरमौर देश मे अजब- गजब
* मगर जब बात हो सचिन के सन्दर्भ में तो बस भजन भजन
* जो साधारण परिवार से असाधारण फहरिस्त में चंदन-वंदन
*महज़ सोलह बरस कुल्फ़ी आइसक्रीम के दिनों में धमक-धनक
*केरियर की शुरुआत वो भी उसके विरुद्ध जो शुमार बड़े शत्रुओं में मानते घृणित ,कुलषित
* सो चाहे बालक हो योद्धा प्रारंभ से ही बनना था,बना लड़ा डटकर
* दुश्मन ने मिसाइल दागी गिरा मगर भरत सा उठा
* जो खेलता था शेरो से खिलोनो की तरह
* लड़ा वो सुरमा अभिमन्यु सा भेद कोई चक्रव्यूह न रोक सका
* मचा कोहराम पे कोहराम रणभूमि में घटोत्कच की तरह
* पाट दिए सारे लक्ष्य कर दिए बोने देखते ही देखते
* सारे आयुध सारे दिव्यास्त्र कर विफल बन गया वो त्रयम्बकेश्वर
* सानी नही कोई तेरे अहले जलवो का हे मास्टर ब्लास्टर
* लघु हो गए सारे आंकड़े आगे तेरे -महा कर्म
* मान लिया तुझे “क्रिकेट का भगवन”
*नव पीढ़ी का तू बड़ा आदर्श न सिर्फ महाखेल से
* वरन बन सज्जन खेल का दुर्लभ सभ्रांत मुखर
* तू विश्व शांति दूत शाही-सज्जन खेल का
* करे नमन जमाना तू महा गौरव खेलजगत भारतवर्ष।।
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* लिटिल मास्टर कद आला इतना तेरा हो गया ।
खेलो का शिखर सम्मान खेल रत्न, अर्जुन पुरस्कार बोना हो गया ।।
तब देश प्रेमियों ने मुहिम छेड़ी लिए तेरे बड़ी भारी ।
ओर सारे नियम से इतर सर्वोच्च नागरिक बिरुद समिति हारी।।
तब नवाज़ा सर्वश्रेष्ट देश शिखर पदवी से
तू बना पहला खिलाड़ी भारत रत्न
वाह भारत रत्न , वाह भारत रत्न।
धन्य भारत वर्ष ,धन्य भारत वर्ष।।
जय भारत वर्ष , जय भारत वर्ष।
विरल भारत वर्ष,जिगर भारत वर्ष।।
+रचनाकार—–
* नरेश कुमार सेवक ‘सनातन’