” छुअन मन की डोर से “
” छुअन”
1. “हर कोई अपने हित चाहता है , दूसरो के हितो से समझोता सिर्फ बिरले पुरुष ही करते हैं ।”
2.” श्रेष्ठ ता जहा मानवीय गुण है उसी तरह अधमता भी । अधमता को बाहर नही लाने का हुनर कम ही लोग या विरले ही रखते हैं ।”
3. ” किस्मत को कई लोग नही मानते हैं लेकिन अफ़सोस मैने उन्हें उसका शिकार या मोहताज़ होते देखा है ।”
4. ” अगर आपने अपनी श्वास ( धड़कन ) को आते जाते महसूस किया तो आप जिंदगी की समझ सकते हैं ।”
5. “यदि आपने किसी शव या मुर्दे में अपनी मृत्यु या किसी अपने अनन्य की मृत्यु का आभास या मृत्यु को महसूस किया हो तो आप जीवन के मर्म को समझ सकते हैं या समझ रहे हैं ।”
6.”भय ही भगवान् है भक्त जन और अभक्त जन इसे आस्था -अनास्था में लेकर प्रेम मार्ग अपनाते हैं ।”
7. “डोली जीवन का शृंगार समझती है वहीं अर्थी जीवन का सार समझाती है।”
8. “सनातन वैदिक धर्म अलोकिक -एकेश्वर -निरंजन -निराकार -अविरल आस्था से शुरू होता है और निर्गुण धारा को प्रभावित अवं प्रबलता देता है लेकिन कालान्तर में सगुण धारा को भी अपनाया जाता है क्योकि प्रतीकात्मक गणितीय सिद्धांत से समस्या हल हो जाती है ।”
9. ” हम जानते हैं मूर्ति में भगवान् नही लेकिन हमारी आत्मा और हमारा शरीर इकं मूरत है जो उस मूरत को देख विस्वास से भर जाता है की हां तू है वो है।”
10. “जहर को कितना ही उबाला जाय उसमे विष या जहर के तत्व या जहर खत्म नही किया जा सकता।”