~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

नकली ठहाके

नकली ठहाके

व्यवसाइक दौर में सच्ची हंसी बाजार से गायब है
तनख्वाह बड़ी,रुतबे बड़े व्यापार में आमदनी अच्छी
लेकिन सच्ची अच्छी हंसी की कमी
सोचता है “सनातन” की
सच्ची हंसी की इक दुकान खोल लूं
तब सवेरे सवेरे हा हा हा हा करने वाले
और झूठी हंसी को योग से जोड़ने वाले
शायद समझे की यूं हंसाना बेकार है
लाखो लोगो की असली हंसी गायब है
आप को ईश्वर ने बहुत दिया है
उस आसमांल से आप बहोतो को हंसी दे सकते हैं
निकली हंसी आप दे भी किसे रहे है

जिनके पास हंसी के खास साधन है
पर वो जाने हंसना हंसाना क्यों भुल गये हैं
इसलिए की वो सिर्फ अपना जीना चाहते है
और अपना जीना असल दर्शन में जीना नही है
निचोड़ ये की हंसी आप उन्हें दे
हां जिन्हे जरूरत है हंसी की
धन असबाब रोजगार दे आप हंसी दे सकते हैं
और ईश्वर ने आपको बहुत दे रखा है
चाहे असल में तो आप हजारों को हंसी दे सकते है
नकली हंसी इक तरह का अभिनय
और अभिनय असल नही नकल ही होता है
और नकल से कोई फायदा असल में कभी होता ही नही….
*Nk सनातन