रक्षाबंधन आत्मीय रिश्तों का आसमान
“अनुजा रक्षा पर्व भारत महान”
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रक्षा बंधन भाई–बहन का आना, है अनोखा बंधन !
त्योहार ये भारतीय संस्कृति, है परम्परा का वन्दन !
कई किंवदंतियाँ, कई कथाएँ, लोक कथाएँ, गाथाएँ~
ये आत्मीयता की धरोहर ,रक्षा-करम धर्म जताएँ
रक्त भाई, धर्म–भाई ,जो भी हो मरते दम निभाएँ !!
धर्म का धागा, अनुराग का वादा, खुशियाँ ढेरों बिखराएँ ।
परम्परा ये चीर काल की, राजा बलि–वामन अवतार, की
बढ़ती आई सजती आई ,रूप बदल स्नेहाभक्ति
हिन्द धरा पर पोषिताए ।।
रक्षा ही धर्म बहना रिश्ता, राष्ट्र परम्परा दिलों जान की ।
आत्मीय दिलों की आवाज़ है राखी पर्व भारत महान की ।।
कालान्तर प्राचीन मध्य इतिहास मार- काट नीज़ अट्टहास का ।
आज मालवा कल मेवाड़ किस्सा गांधार मध्य महान का ।।
कोई नहीं सुरक्षित किस्सा सिर्फ युद्धों आधिपत्य मानसिक्ता का ।
कब किस पर हो आक्रमण ,इतिहास अनिश्चितता शंकित भाव का ।।
युगांधर युगांतर क्रूर इतिहास रहा कमजोर भारत भाल का ।
नीज़ स्वार्थ समृद्धि ,आपसी बैर, ललचाया मन विदेशी खाल का ।।
तब उजागर कमजोर चेहरा भारत बड़े मान–शान का
वीरता ताकत में सानी नहीं कोई वीर भारत शान का
कईयों के छक्के छुड़ाये, मैदानी
जंग में सज़ा इतिहास भारत का
भारत वीर रणबांकुरों की सदियों से खान रहा
भारत रहा इतिहास वीरों शूरो रणबांकुरे रणभेरी रोद्रम मान का
युद्ध भी हमने लड़े हैं नैतिक गुणों बाह, थाह में
लेकिन रिपुओं ने अपनाए पैतरे शकुनी चाल के
धोखा, महत्वाकांक्षा स्वार्थ ,अवगुण पाले ओर जी भर गहराऐ
आक्रान्ताओं की नियत बुरी, अस्मत अबलाओं की~
भय प्राण में
हर भार्या किसी की बहन–बेटी जब योद्धा निकले महासंग्राम में !
तिलक लगाती हाथ राखी सजाती ,आरती उतारती, मीठा मुँह करवाती !
प्यार वारती,विश्वास ढालती, विजयी गीत गाती, आशीष बरसाती स्नेह दुलराती
इक पवित्र धागे का महत्व जताती !!
राखी पर्व दुनिया देश कही नहीं
भारत की ये धार्मिक परम्परा सिर्फ यही
रक्षा आस्था पर्व राखी भाई-बहन बड़ा पावन महान
रानी कर्णावती राखी भिजवाये मुगल हुमायूँ दौड़े चले आए
हाँ ले धर्म धजा मानस जहान
भाई बहन का अतुल्य स्नेह रस बिखरे मीठे रंग सात- महान
सात सुरों में बजता जाए सरगम, लिए हिन्दू मूल्य महान
आओ भाइयो भारतवासी, हर बहन दामिनी–यामिनी हमारी
इज्जत सतीत्व पतिव्रत ,कोमार्य सब कीमती जेवर समान
क्या हिन्दू क्या सिख क्या ईसाई इस्लाम सब उसकी जान
माने अगर हम ऐसा दैविक इलाही रूहानी ऊपर ऐलान
तब बहने-बेटी माताएँ पत्नी सब महफूज रहें सरे बाजार !
तब ना कोई दामिनी -निर्भया पीड़ित-पीड़िता
हो चाहे दिन या रात हर मादा बिंदास प्रियंका
ना कोई छुपे घोड़े
ना कोई भेड़िया रंगा सियार
फिर काला बुरा विषैला नही कभी वो अध्याय !!
*NK सनातन