~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

रूहानी डीएनए..

रूहानी डीएनए..

मेरे रूहानी अक्स ,भंग उसमे भी,पर नही कोई अंग रंग

मेरे रोम रोम में समाए तुम
मेरी रूह में छाए तुम ही तुम
हूं किसी गैर की भोतिकता के साए
जिश्मफरोशी बेशक मजबूरी बाएं
मगर रूहफरोशी हरदम संगना तुम्हारी आहें
फलित कोख वंशधारी
सांसारिकता दाएं
धरम ऐ हक उसके मैं गैर देहहारी वारी
मन के मसीहा तुम ही तुम दैविक महावारी
देख मेरी संतति उठता शक शुबा भारी
परिवार और खुद शौहर बना है बड़ा सवाली
पूछता है अक्स गया किस पर है रमता
की डीएनए आइना जांच हूं मांगता
गर तुम तन से पावन तो दूध का दूध पानी का पानी
वो आदम ठहरा उसे हक क्योंकि देह को पावनता से जोड़ा
है मलाल उसे जबकि दैहिक सतीत्व उसके नाम जड़ा
दुनिया ऐ फानी
हां सतित्व को ले गर दैविक सोच मुनि जमदगने की भार्या रेणुका को लेकर
जिनके खयाल इक पल इक बार आया
ओह ये पुरुष कितना सुंदर कितना छैला बांका
महामना मुनीश्वर के पवित्रता के शास्त्रीय आसमानी मायने
इसलिए पतितता के सवाली विधान में पतिव्रता के आईने
आई घेरे में सती रेणुका महामुनि रानी
और सर कलम का फरमान परशु बने जानी
इस लिहाज से मैं रूहानी अब भी तुम्हारी
डीएनए जांच हुई रिपोर्ट आई
निकला सच जो सच था की वो उसी की संतति
मगर अक्श तुम्हारे बड़ी खूब जलवानुमाई
कारण क्या मैं जानती थी
होता जब भी वो जिस्मानी
रूह में तब मेरा इश्क सूफियानी
यानी मन मंदिर में बस याद तुम्हारी
तो मेडिकल साइंस प्रकृति के नियम खोटे हुवे
क्योंकि शरीर से डीएनए की जांच हो सकती है
लेकिन मेडिकल साइंस में अफसोस
रूह का हां रूह का कोई डीएनए टेस्ट नहीं हो सकता !!
झूठ और सच के मायने नारको टेस्ट
लेकिन वो भी सौ फीसद कहां सच्चा !!
*Nk सनातन