~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

लोरी की बेइज्जती मुहावरे से

**शबीना अदीब को मेरा तीर*
( अभी पिछले माह राहत इन्दोरी साब की महफ़िल में शायरा शामिल थी जिसमे उन्होंने अपनी प्रस्तुति के दरम्यान दर्शकों को कहा कि लोरी नही सुना रही हु
शेर सुना रही हु तो तालियां बजा कर मुझे ऊर्जा दे
पर मेरा जवाब!!!!!!!!
शायरा शेर की बिला पर उस लोरी को कम आंकती हैं
माँ की लोरी शायद तुमने सुनी ही नही वरना
वाहियात खयाल तुम यू उड़ेलती नही
दुनिया मे नाजायज ओर सौतेली माओ वाले
हैं बदनसीब बहुत दुधमुई दुधमुये बच्चे
जो एक लोरी को तरसते हैं
शायद तूम भी उनमें एक बदनसीब है
जिसने इस खुदाई आवाज़ को कम आंका
वरना कामयाबी के मद में तूम खुद को तोलती
ओर उन माओ ओर उनकी लोरी का अपमान न करती
जिसमे खुदा ओर जन्नत का सारा जहांन बसता है।
माना आपका भाव पाक रहा हो कि लोग उनिंद न हो जाय
ओर सुने आपको दिल से दाद के साथ
लेकिन ऐसे द्वेत झुमले तंज मुहावरे से
हां एक लॉबी में विवाद उठे कवित्त में ठीक नही
ये हिंदुस्तान है अपना वार्ना पद्मिनी देखो
आह जायसी की पद्मावत न हरि झंडी पाती।
*शबीना जी मैं आपका बड़ा मुरीद हु विशेषकर आपकी नायब प्रस्तुति ओर वो ग़ज़ल
की अभी तो मोहब्बत नई नई हैं
*लेकिन ऐसे मुहावरे ओर झुमले न कसे की एक लॉबी इसे द्वेत अर्थ में ले और आपका तंज आपत्तिजनक लगे।
*nk सनातन
*+Mitro
नव संशोधन के साथ
शायरा साहिबा को पूरी अदब देते हुवे