सर्वशक्तिमान एक ही है…!
ईश्वर ,अल्लाह, गॉड हैं सब एक ये छद्मता अब छोड़
【 शायर/ कवि सैय्यद कासिम बीकानेरी के द्वारा अपने मित्र सैनी जी के स्नेह में घड़ी पंक्तियों के संदर्भ में एक सनातनी खयाल 】
एक कवि एक शायर किसी समाज का नहीं होता
वो होता है सम्पूर्ण वैश्विक समाज का आईना
इसी तरह भाषा भी संकीर्णता से परे सार्वभौम
कवि -शायर भी शब्दो मे बाट क्या संदेश देता
बस तेरा -मेरा हाँ भगवान और अल्ला
अफसोस कवि-शायर को ये छद्मता नहीं पालनी चाहिए
तू उसका भगवान बता रहा है खुद का अल्लाह
न ख़ुदा देखा न भगवान न ही गॉड
हाँ दावे कइयों ने किए लेकिन जब उन्हें दिखे
तो सर्व साधारण को भी दिखे तो विश्वास हो
एक कवि -शायर समाज को एक करता
सारे धार्मिक अधार्मिक भेद मिटाता
कवि मैथिलीशरण गुप्त कहते सारा विश्व एक देश हो
हो विचरण विहग सा न कोई रोक टोक हो
ओर महान सनातन परंपरा वसुधैव कुटुम्बकम
है प्राचीन सत्य तो क्यो न इस पर अमल हो
न उसका भगवान लिख
ना खुद का अल्लाह लिख
न उनका गॉड लिख
लिख तो लिख “सनातन” सिर्फ और सिर्फ सर्व शक्तिमान या सर्वेश्वर
दावा सनातन का फिर किसी को नहीं ऑब्जेक्शन
*nk सेवक “सनातन”