~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

[ कहानी की भूमिका

★ कहानी शीर्षक : धन्यवाद डाक-विभाग ★
[ कहानी की भूमिका :
आज उच्च तकनीकी युग में दुनिया छोटी हो गयी है और शारिरिक-मानसिक दूरियां खत्म हो गयी हैं। यूँ कहे कि आज के अद्धतन दौर में व्यक्ति दिव्य लोक में जी रहा है क्योकि आज स्वर्गिक सुख जैसी सारी सुविधाएं आदमी को मयस्सर या उपलब्ध हैं। लेकिन मेरी निम्न उल्लिखित कहानी उस दौर की है जब ये तमाम हाई टेक संसाधन ओर सुविधाएं व्यक्ति को मुहैया न थी। समाज पुरूष प्रधान था ,शिक्षा और शिक्षित गिनती के थे, रोजगार के साधन सीमित थे और ग्राम्य हलकों में थे पर नगण्य के बराबर ,लोग ज्यादातर खेती वो भी मौसमी खेती पर आश्रित थे। सिंचाई के साधन नहीं थे कृषक वर्ग सिर्फ इन्द्रराजा यानी सिर्फ़ आसमानी खेती पर ही निर्भय था। संचार के नाम पर सिर्फ रेडियो ओर टेलीफोन वो भी रसूख ओर समृद्ध लोगो को ही नसीब था। टेलीफोन ओर डाक विभाग की सुविधा सिर्फ महानगरों में ही उपलब्ध थी ।चिट्ठीयों के लिए सिर्फ डाक विभाग वो भी पूरे जिले में एक ओर मनी आर्डर की सुविधा थी….]
मुख्य पात्र :

मूल कारक (निर्जीव पात्र) एक चिठ्ठी जिसके इर्द-गिर्द कहानी चलती है
2.दो भाई-

अबीर (बड़ा) जो महानगर में परिश्रमिक है

गुलाल ( छोटा) गांव में ही किसानी करता है
3.एक बहन (छोटी) -चेना
4.माता- पिता
(छोटा बेटा) खेतिहर
दूसरा बेटा (बड़ा) बड़े शहर में बहुत दूर मेहनत- मजदूरी एक फेक्टरी में।
बड़ा बेटा शादी-शुदा है। दोनो भाई 3 जमात उत्तीर्ण हैं यानी कच्चा-पक्का पढ़ लेते हैं।
माता- पिता उम्रदराज हैं।
पिता की मौत हो जाती है । ओर मौत की चिट्ठी बड़े भाई को जो सुदूर परिश्रम करता है को
चिट्ठी मिलती है दस दिन बाद बड़ा बेटा आया ओर तीन महीने रुक वापस शहर काम-काज को चला गया ।
परिवार की खेती बाड़ी औसत थी बस घर का दाना- पानी हो जाता था ।
अब एक दिन माँ की तबियत बिगड़ी ओर मां चल बसती है! छोटा भाई तुरन्त
चिठ्ठी लिखता है और पोस्ट कर देता है। लेकिन इस बार पोस्ट ऑफिस का कमाल रहा चिठ्ठी नही पहुँचती है!
एक माह हो गया कोई खबर नहीं !
तभी बड़े भाई की चिट्ठी आयी इसमे सब ठीक था अम्मा का खयाल रखियो
बापुजी के सारे रीति-रिवाज़ पूरे करियो, पेसो की चिंता मत करियो, मैं मॉनी आर्डर करता रहूंगा ….!!!!!!!
अब छोटा भाई सोच में था कि क्या करे माँ के स्वर्गवास का पता नही लगा है भाई को…! यानी साफ है चिट्ठी नहीं मिली है! सोचता है दूसरी लिखूं लेकिन तभी संभलता है कि नहीं…. राज को राज रहने दू, अग्रज बहुत दुखी होगा क्योकि अभी पिता श्री का शोक तो गया नहीं है!
चलो भाई को दुःख नही देना वैसे भी मां भाई से दूर ही थी उसके लिए तो स्तिथि बराबर की माँ गाँव मे है … ओर उसने दूसरी चिठ्ठी लिखी की माँ अच्छी है वो तुम्हे बहुत याद करती है, कहत रही कि ध्यान से काम करे और खाना पीना समय पे करे…इहा की तनिक भी चिंता न करे!
यू तीन साल हो गए ….
एक दिन उसे (बड़े भाई) घर की खूब याद आयी वह छुट्टी लेकर गांव जाता है । शाम का समय सब घर पर, देखते ही बच्चे लिपट जाते ,भाई गले बहु पत्नी पैर छूते हैं…
तभी वो कहता है अम्मा कहाँ है? सुनते ही सब क्षुब्द रह जाते हैं !तभी सम्पट काटते हुवे अनुज कहता है माँ मामाजी के वहाँ गयी है उन्हें भाई की खूब याद आ रही थी सो…
(अनुज ने पहले ही सब को कह दिया था कि कोई भी ये राज न बताए)
बड़ा भाई अच्छा कोई बात नहीं….!
अब गांव से एक व्यक्ति से उसे पता लगता है कि अम्मा जी नहीं रही तो वो सहम जाता है लेकिन वह समझ जाता है कि परिवार उसे इस दुःख को देना नही चाहता था !
वह भी बिल्कुल दुरस्त घर आता है और दो- चार दिन घर पर ही सहज रहता है और कहता है कि छोटे मुझे कल शहर निकलना पड़ेगा क्योंकि सिर्फ चार दिन की ही छुट्टी मिल पाई है । और ये लो केश रुपये ओर अम्मा को ले आइयो या मामा वगैरह रखने आये तो ठीक ! अम्मा की उमर हैं न तो पूरा-पूरा ध्यान रखना !
(छोटा भाई सब कुछ बताना चाहता है लेकिन ये सोच की भाई को पता नही है तो क्यो दुःख दु ओर चुप रह जाता है ! जाते ही बड़े भाई की चिट्ठी आती की माँ का विशेष ध्यान रखना ।
छोटू भी जवाब में लिखता है की माँ अच्छी है तोहे बहुत याद करती है..
शहर में बड़ा भाई फुट- फुट कर रोता है कि उसकी माँ दुनिया मे नहीं रही….ओर मेरा भाई कितना अच्छा और महान है की वो मुझे दुःखी करना नहीं चाहता है ओर राज दबाए हुवे । लेकिन एक दिन तीन साल बाद वो चिठ्ठी उसे मिलती है और वो हँसता है कि हे ईश्वर तू समय मे रुलाना नही चाहता था और मैं बेसमय रो नहीं सकता….वो तुरन्त गांव पहुँचता है चिठ्ठी लेकर
भाई कहता है– भैया अचानक
हां छोटे मुझे 4 रोज पहले चिठ्ठी मिली कि माँ अपनी नहीं रही…भाई देखता है उस पर तारीख 3 साल पहले की
दोनो भाई गले मिल कर फुट फुट कर रो दुख बाटते हैं… फिर बड़ा कहता है माँ के फूल कहाँ हैं भाई कहता है संभाल के रखे हैं… भाई कहता है कल ही सारा परिवार गंगाजी जाएगा और माता-पिता दोनो के फूल विधि विधान से गंगा मैया में विसर्जीत करेंगे और दर्शन करेंगे !
*nk सनातन
नोट: this story is penned by me dedicated to greatest mr मुंशी प्रेमचंद जी aka धनपतराय

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