शिक्षक न दीपक होता न जलता है
वह सिर्फ शिक्षक होता है
ओर उसे कोर्स जल्दी पूरा कराने का ही जुनून होता है
छात्र सीखे पढ़े न पढे, सुने ,गृह कार्य करे न करे
उसे कोई मतलब नहीं होता है
जैसे तैसे कोर्स पूरा हो जाय बस यही टेंशन होता है
बस कुछ बच्चे ट्यूशन आ जाये जुगाड़ होता है
ओर वो एक्स्ट्रा राशि होठो की लाली बन जाये
खुमार होता है
ओर सबसे ज्यादा महीना जल्दी पूरा हो
वेतन खाते चढ़ने का प्यार होता है !
*nk सनातन