मौत : आईना ऐ गौरतलब!

मौत : आईना ऐ गौरतलब!

मौत – आईना ऐ गौर तलब

एक के बाद एक लोग बिछड़ते जा रहे हैं !
ओर हम-तुम कतार में लगते जा रहे हैं !!
कुछ अपने तो कुछ पराए दुनिया से चले जा रहे हैं !!!
गाहे-बगाये याद फिर बिसरे जा रहे हैं
उम्र चालीस से पहले मौतों के मंझर थे पर छूट पुट!!!
बाद इसके एक के बाद एक विकेट गिरते जा रहे हैं !!!!!
कोई क्लीन बोल्ड कोई हिट विकेट तो कोई रन आउट
ओर कोई कैच आउट होते जा रहे हैं !!!!!!
यानी सब अपने अपने तय ऐ खुदा के तरीके
हां इस दुनिया से उस पवेलियन कुच करते जा रहे हैं
क्रिकेट की तरह दूसरी पारी का चलन नहीं !!!!!!
यहां एक बार जो आउट हुवे दीवार पे टंगे जा रहे हैं !!!!!!!
उम्र ऐ अर्धशतक ‘राम ‘ कुछ समझ आ रहे हैं
राम नाम सत्य हो उससे पहले समझ जाएं ये सत्य
तो ठीक है
वरना लोग तो होंगे कुछ अर्थी या जनाजे के पीछे
पर औपचारिक
हो लिए सच्चाई भरा दुःख ,अफ़सोस कर जा ऐसी बात -करामात
फलसफाई शेर ऊपर वाले के दुनिया में जो हैं
समझ से पहले समझ आ रहे हैं
अच्छी बात है अगर ऐसा ही है वाक़ई तो समझ
दरवाज़े जन्नत के तेरे लिए खुले जा रहे हैं।
*nk सेवक “सनातन”

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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