तकरीर ऐ सनातन

तकरीर ऐ सनातन

*अभिवादन मुद्रा*
ये अभिवादन मुद्रा है
इस पर सिर्फ राजनेताओ का अधिकार नही
इस पर अधिकार भारत का सबसे बड़ा पद नागरिकता (PV नरसिम्हा राव द्वारा उद्धत विचार) पर विराजमान नागरिक का है…..
लोकतंत्र में कोई मंत्री कोई नेता सिर्फ लोक सेवक होता है उसे राज शाह जनता के वोट (बहुमत) बनाते है … हर राजनीतिक दल,राजनेता,नेता जनता जनार्दन पर आश्रित है
जो आम को खास बनाते है अपने कीमती मताधिकार से !
चुनावी समीकरण तेज हो चले है
चोर डाकू साधु रसूख अपराधी इक हो रहे है
आखिर राजनीति के गलियारे इतने संकरे होकर चौड़े है
*Nk सनातन

*बस यूं ही नही बस यू ही*
इक 80 साल के बुजुर्ग ने कहा~~हे परमेश्वर मुझे उठा ले !
ईश्वर ने कहा~
ऐसे कैसे उठा ले तुमको
अभी तो हिसाब बहुत बाकी है…!
तुम्हे बहुत कुछ भुगतना है यही इस धरती पर…
कभी पीछे मुड़ के तोला है अपनी जिंदगी को…
स्वर्गीय होने पर तो मज़े ही मज़े है ! इसलिए सॉरी मानव…
बुजुर्ग~भगवन
भगवान~भगवन वगवन कुछ नही..और लोप यानी ईश्वर अदृश्य हो गए..
और पूरा पूरा..संसार में भुगतने के बाद जब वह बुजुर्ग स्वर्ग पहुंचा .. वहां भगवान से उसने कहां की ईश्वर मैं आपसे धरती पर मिल चुका हूं जब मैने आपसे मरने की गुहार की थी…
ईश्वर ने कहा~अरे नादान मैं कभी धरती पर जाता ही नही
बुजुर्ग~तो वो कौन थे जो मुझे दिखे और संवाद हुवा
ईश्वर ~अरे नादान वो धरती पर अवतरित दानव देवाधिराज यानी दानवों का महाराजा था
बुजुर्ग~सुन चौंका..
भगवान वो दानव था
ईश्वर~हां हमने आदि काल से धरती का ठेका दानवों को दे रखा है…वही सब वसूल करता है
बुजुर्ग~क्यों..
परमेश्वर~क्योंकि सारे पापो के फल तुम धरती पर पीड़ा रूप में भुगत सको …दानव अभी तक हमारे कॉन्ट्रैक्ट के प्रति पूरे ईमानदार हैं…!!!!!

*Nk सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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