देशजनों सावधान रख अभिमान
“देशजनों सावधान !”
आज की नही- भारत वर्ष के हर काल की
पीढ़ी दर पीढ़ी -हाँ ये सोचना जरूरी है
की की आजादी और राष्ट्रीयता सर्वोपरि है
ये आन बान शान अक्षुण रखना जरुरी है।1।
देशभक्ति का जुनू हरदम,अविराम रहे
हर भारतीय में ये खूनी उबाल जरुरी है
धारा ये खूब बहे जैसे हो जीवन संचार में
नेटवर्क तगड़ा हो मकड़जाल कुछ ऐसा हो
रिपु जो फंसे एक बार मुक्ति पाये हमारे ग्रास से
या फिर मर जाए खुद ब खुद जाल के झंझाल में ।2।
हमसे अदने हमसे नाटे छोटे देशों ने
क्या अजब – गजब राष्ट्रीयता दर्शायी है
देश सबसे ऊपर सोच पग पग रंग में जताई है
मुखर देश भी उनकी वाह करते ऐसी शान दिखाई है
लघु होकर भी बड़ो बड़ो को आँख दिखाई है
ओर इतिहास गवाह उन्होंने फिर कभी ठोकर खाई है।3।
देशजनों मेरे सावधान आजाद है हम
मनाते वर्ष दर वर्ष राष्टपर्व की वर्षगांठ
लेकिन याद रखे मान शान अभिमान रखें
स्मरण रखे ये आजादी हमे यू ही खैरात में नही मिली
ढेरों अनगिनत कुर्बानियां अपनो की लाशे देखी हैं
जुल्मो आतंक क्रूरता का चरम इंतहा देखी है।4।
देखे अपने ही घर मे गुलामी के विषम काले साये हैं
तुमने देखे नही आज के देशजनों सिर्फ़ किताबो में पढ़े हैं
गाहे बगाहे देखे हैं चलचित्रों के नकली सायो में
वो भीषण मंझर वो जुल्मी वेदनाएं
गर महसूस करे तो मन सिहर उठता है
ओर जांबाजो के खून खोल उठते हैं।5।
देखे नही इसलिए हमारे लिए इसके कड़े नही मायने हैं
देश जनों सिद्धांत में पढ़ो जी से अगर
इक सिहरन सी कोंध जाती हैं जो सुरमा हैं
ओर जो कायर हैं घिग्गी सी बंध जाती है
लेकिन वो कायर भी महसूस कर झट से बहादुर बन जाते हैं
इसलिए सिद्धांत नही व्यवहार में जियो आजादी को
तो तो देशवासियों ये आजादी महंगी
बहुत महंगी है इसे संभाल के रखे
देशजनों संभाल के रखे।6।
*nk सनातन