■ धार्मिक कट्टरता की आग पर समुदायिक सौहार्द्र के पानी की महत्ती जरूरत !■
भारत का एक खास पड़ोसी बांग्लादेश जहां सामुदायिक सौहार्द में तिराड़ की कोशिश ! *
बांग्लादेश में नवरात्रि हिन्दू जन महोत्सव के पावन सुअवसर पर कुछ असामाजिक तत्वों ने जो कट्टरवाद से प्रेरित थे, सामाजिक समुदायिक सौहाद्र के वातावरण को बिगाड़ने की कोशिश की तब जब उन्होंने उन पावन पांडालों ओर मंदिरों पर ताबड़तोड़ हमले किये और हिंसा फैलाने की कोशिश की। स्मरण रहे बांग्लादेश में हिन्दू अल्पसंख्यक समुदाय है । मीडिया रिपोर्ट्स ओर सूत्रों के हवाले से इन हमले को स्थानीय सत्तारूढ़ दल के लोग परोक्ष रूप से इसमें विपक्ष का हाथ होने का अंदेशा बता रहे हैं । कारण कुछ भी हो परिणाम ये की तीन निर्दोष हिन्दूओं की हत्या हुई और लगभग साठ के करीब अल्पसंख्यक हिन्दू घायल एवं आहत हुवे हैं । सत्तारूढ़ दल ने उन कुटिल तत्वों पर कड़ी कार्यवाही का आश्वासन दिया ओर बांग्लादेश में सामुदायिक भाईचारा हमारी प्राथमिकता है और अल्पसंख्यक समुदाय के साथ न्याय किया जाएगा ऐसे लोकतांत्रिक ओर पुख्ता बयान देकर अपनी साफगोई ओर जिम्मेदारी दर्शाई है ये एक सराहनीय कदम है । लोकतांत्रिक देश मे प्रत्येक व्यक्ति चाहे वो किसी भी धर्म, जाति-समुदाय का हो सरकार की नैतिक जिम्मेदारी ओर कर्त्तव्य होता है की वो उनकी सुरक्षा करे ! तत्पश्चात एक ओर जुल्म हुवा जब मशहूर विश्व कृष्ण हिन्दू समुदाय इस्कॉन मंदिर पर भी हमले हुवे है।
इन अमानवीय कृत्यों की लोकतांत्रिक रूप से इसका पुरज़ोर मगर शांतिमय विरोध हो रहा है । स्मरण रहे कि बांग्लादेश का स्वतंत्र आस्तित्व भारत के दखल ओर मदद से हुवा जो इक इतिहास है । ओर बांग्लादेश के एक मंत्री जी ने कहा कि भारत हमारा बहुत अच्छा पड़ोसी है और हमारी आज़ादी में इसका बहुत बड़ा हाथ है और यहां अल्पसंख्यक समुदाय को समान संरक्षण दिया जाएगा । )
सुना मंदिर पांडाल में कुरान रखी किसी ने ?
किसने, हिन्दू तो रख नहीं सकता !
मुसलमान भी नहीं रख
अपनी कुरान को !
तो सवाल यही की- 2 किसने रखी वहां उस कुरान को ?!
ओर अगर हिन्दू रखता तो किसी को क्यो कहेगा
ओर वो भी उन्मादी कट्टरपंथी शख्स को
अब रखी इस बात पर-2
यानी जाहिर है साजिश के पैर हैं इसमें
टूट पड़ता है कट्टरपंथी तबका
बिना जाने की ये कैसे हुवा !
सिर्फ़ भड़काव से आया ये उबाल
ओर पांडाल ,मंदिर- मूर्ति सब तहस-नहस
ओर हिंसा हत्या चीखे विभत्स दृश्य
ओर तीन निर्दोध हिंदुओं की मौके पर मौत
लगभग साठ हिन्दू भक्त जन घायल -शायल
ये तर्क का विषय की भई
हिन्दू क्यों रखेगा तुम्हारी कुरान को ?
ओर जाहिर है मुसलमा भी नही रखेगा अपनी कुरान को !
तो फिर ये किसकी चाल है किसकी कारस्तानी ?
ये आने वाले चुनाव का सियासी पैतरा है या कट्टरपंथीयो का धार्मिक उन्माद है !
जो भी हो कुछ तो कारण है इस दुर्दांत घटना के पीछे !
इसमे सियासत की बू साफ है
पक्ष -विपक्ष अलग बात है
या किसी आतंकी समूह का भी हाथ !
चुनाव नज़दीक है आईना साफ है !
ऐसा भी कयास है
लेकिन सत्ता के लिए साम्प्रदायिक सौहार्द
को हवा देना
ये कहां का मलिन आईना है !
हालाँकि सब जगह ये हो रहा है
सत्ता के लिए कोई अपनों को ही मरवा रहा है
कोई उनको मरवा रहा है
परिणाम ये की धार्मिक ,
सामुदायिक पक्ष सांत्वना की लय में
लहर से बहुमत भुनाया जाता है
या उन्हें सहज चुन लिया जाता है
यानी सत्ता पर काबिज़ हुवा जाता है !
हकीकत कुछ-कुछ यही की
ये सियासी खेल बहुत सयाना बहुत गहरा
वो किसी हिंसा और हत्या पर कहते हैं
इस बार कुछ अपने यानी आपके लोगो को मारा भुना
अगली बार शायद तुम्हारी या तुम्हारे ही अपनो की बारी होगी
क्योकि देश और सत्ता की अक्षुण्णता का सवाल है
ओर इस पर बड़ा मानवीय विचार ये है कि करोड़ो हैं
इसमे हज़ार दो हज़ार मर जाये तो क्या फर्क पड़ता है !??
लेकिन अभी कम जान-माल का नुकसान
भविष्य में इसका बड़ा फ़ायदा है !
क्योकि ये सब हथकंडे अपना ही हम तुम्हारे भले के लिए ही है !
अभी हम कुछ ही मार रहे हैं अपनो को
लेकिन हम नही सत्ता में तो वो पराए लाखो मारेंगे
ओर एक दिन तुम सिर्फ़ इतिहास में रहोगे
की इतने थे और तुम्हारा यू सफ़ाया हुवा
तो बोलो हमारे हाथों हज़ार मरना पसन्द करोगे
या लाखो उनकेँ हाथों मरना पसन्द करोगे !
एक आम आदमी हामी भरता है की
सरकार आपकी बात तो एकदम सही ओर सटीक है !!
आप हमारा कितना भला ओर दूर की सोचते हैं !
तो ठीक है पांच साल तो हैं हमरे पास अभी जिंदगी जीने के !
पाँच साल बाद जब चुनाव आएंगे तब हमारा नंबर लगा देना सरकार
ओर भुना लेना नाज़ुक कौम की लहर !
हम कुर्बानी देंगे अपनी कौम के भले के लिए!
लेकिन सरकार हमारा मूर्ति लगना चाहिए बलिदान के बाद !
मंत्री या राजनेता –
हे ! दमाग खराब हो गया है क्या तुम्हारा ?!
कभी कही कीड़े-मकोड़े की मूर्तियां लगती हैं क्या ?!
इस तरह एक आम आदमी की मौत की कोई कीमत नही
यानी कीड़े -मकोड़े में गिनती इक आम आदमी की
ओर नहीं किसी भी आम आदमी की मौत पर राष्ट्र ध्वज झुकते है
जबकि वह बड़े महान लोकतांत्रिक पद” नागरिकता” पर विराजित है !
लेकिन कोई कुछ नही, न बड़े -बड़े गुलदस्ते न फुलहार ओर ढेरो श्रद्धांजलियां !
ये राजनीति का एक स्याह पन्ना है
हर देश और दुनिया का
हिंसा-प्रतिहिंसा का यही आम चेहरा है
इस पर कई गहरे सवाल है !!!
इस पर मनन-मंथन होते हैं !!!
लेकिन कोई कारगर हल नहीं निकलते !!
दुनिया मे धार्मिक कट्टरवाद खतरनाक है
इसे दुनियावी सामूहिक इक जुट प्रयास से, सदा के लिए मिटाना बड़ी ज़रूरत, बड़ी मांग है । लेकिन इसमें प्रयास दोहरी भूमिका वाले होते हैं ! अतः सफलता सिफ़र है! लेकिन अभी भी कोई बात है कि सिर्फ आंशिक ही ऐसी वारदातों की बात है। और कुल मिलाकर संसार में शांति का हाल है ! सर्वशक्तिमान समस्त विश्व समाज को एक जुट करे और परस्पर प्रेम- सहयोग की प्रकति दुनिया मे चिरस्थाई रूप से स्थापित हो !
*NK सनातन