बिखरी जुल्फें उलझे ख़याल!

बिखरी जुल्फें उलझे ख़याल!

■ बिखरी जुल्फे उलझे ख़याल ■
●रोज सुलाता है वो जगाता है वो
लेकिन एक रोज वो उठाता नही
अपने जहां में ले जाता है
यहां सिर्फ मुर्दा रह जाता है
ओर उस रात भुत दावत से गुलज़ार होते हैं
यू तो हम लाश जलाते हैं दफ़नाते है
असल मे वो शरीर उनके नाम होते हैं !
*Nk sanatan
●खयाल क्या से क्या आने लगे हैं
क्योकि एक के बाद एक लोग
यानी अपने-पराए दुनिया से जाने लगे हैं !
*Nk sanatan
●तुमने जैसी महोब्बत की शायद ही किसी ने की होगी अपने दिलबर जान से
तुम हमपे कितनी
जानिसार थी सिर्फ हम- तुम जानते हैं
*Nk sanatan
●तुम्हें हक है हमसे बहुत सी शिकायतें करने का
तुम्हारी इसी अदा को हम जाँनिसार, दिलोजान कहते हैं ।
*Nk Sanatan
●मेरी कहानी नायिका प्रधान तुम इसकी बहुत खास किरदार हो
किताबे लाख कहे पुरुष प्रधान समाज
असल मे सब मोहतरमा के गुलाम होते हैं !
Nk Sanatan

●तुम्हें हमसे लाख शिकायते हैं भला
तुम कुछ भी कहो
इन्हें हम उपहार समझते हैं!
*Nk Sanatan ●

तेरी परेशान करने की आदत में भी कद्रदानी
हम खूब समझते है
परेशानी में मझा इतना कि खुद को खुशगवार समझते हैं !
Nk Sanatan
●बुला बुला के ऐ नादान यू परेशान बहुत करती हो
तुम हो इतनी हसीन की ये ज़ुल्म सरेआम करती हो !
Nk Sanatan ●

बुला बुला के दिल ऐ बहार ,गलहार करती हो
दिन में ये हँसी जुल्म कई बार करती हो।
*Nk sanatan

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

Leave a Comment

Keep reading

You may also like

बस में कुछ नहीं ! Hindi

बस में कुछ नहीं !

बस में कुछ भी नहीं! जी है जिंदगी ऐ खुदा जैसा तूने जिलाया है हंसाया कम रुलाया है बहुत जिलाया है तूने…

August 28, 2021 Read →