~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

बिखरी जुल्फें उलझे ख़याल

■ बिखरी जुल्फे उलझे ख़याल ■

●रोज सुलाता है वो जगाता है वो
लेकिन एक रोज वो उठाता नही
अपने जहां में ले जाता है
यहां सिर्फ मुर्दा रह जाता है
ओर उस रात भुत दावत से गुलज़ार होते हैं
यू तो हम लाश जलाते हैं दफ़नाते है
असल मे वो शरीर उनके नाम होते हैं !
*Nk sanatan

●खयाल क्या से क्या आने लगे हैं
क्योकि एक के बाद एक लोग
यानी अपने-पराए दुनिया से जाने लगे हैं !
*Nk sanatan

●तुमने जैसी महोब्बत की शायद ही किसी ने की होगी अपने दिलबर जान से
तुम हमपे कितनी
जानिसार थी सिर्फ हम- तुम जानते हैं
*Nk sanatan

●तुम्हें हक है हमसे बहुत सी शिकायतें करने का
तुम्हारी इसी अदा को हम जाँनिसार, दिलोजान कहते हैं ।
*Nk Sanatan

●मेरी कहानी नायिका प्रधान तुम इसकी बहुत खास किरदार हो
किताबे लाख कहे पुरुष प्रधान समाज
असल मे सब मोहतरमा के गुलाम होते हैं !

Nk Sanatan

●तुम्हें हमसे लाख शिकायते हैं भला
तुम कुछ भी कहो
इन्हें हम उपहार समझते हैं!
*Nk Sanatan ●

तेरी परेशान करने की आदत में भी कद्रदानी
हम खूब समझते है
परेशानी में मझा इतना कि खुद को खुशगवार समझते हैं !

Nk Sanatan

●बुला बुला के ऐ नादान यू परेशान बहुत करती हो
तुम हो इतनी हसीन की ये ज़ुल्म सरेआम करती हो !

Nk Sanatan ●

बुला बुला के दिल ऐ बहार ,गलहार करती हो
दिन में ये हँसी जुल्म कई बार करती हो।
*Nk sanatan