■हल्का -फुल्का तड़का■
एक आदमी सपने में–
हे परमेश्वर मैं विचार शून्य होना चाहता हूँ कोई सटीक उपाय बताओ…क्योकि बाबाओं,संतो,मुनियों ,गुरुओं की शरण मे गया तो वे कहते हैं आंखे मूंद लो अपने आप को ईश्वर के स्मरण में ले जाओ कुछ पलों के लिए दुनिया परिवार सांसारिकता, माया मोह सब भूल जाओ
फिर डूब कर परमात्मा की भक्ति करो..
लेकिन ईश्वर उनकी शरण से कोई फायदा नही हुवा
ओर वो ऐसा कह सकते हैं क्योकि उन्हें बिना मेहनत -मजदूरी के सब ऐशो -आराम मिल जाते हैं क्योंकि अंधभक्त-भक्त प्यासे लोग अपना सब कुछ लुटा देते हैं
*ईश्वर- अरे मानव तू स्प्ष्ट शब्दो मे बोल चाहता क्या है
मानव- की भगवन मुझे उनकी शरण मे जाने से कोई फायदा नहीं हुवा ऊपर से एक लाख गो रक्षादान ओर भंडारे दान कर आया
ईश्वर- तो फिर सुन मैं तुझे अपनी शरण मे ले लेता हूँ तू विचार शून्य होकर स्वर्ग में आनंद करेगा
*मानव- अरे ईश्वर जी मेरा भाव ये नही था कि मैं अभी स्वर्ग में आऊ
अभी तो ये नरक ही बढ़िया है भगवान मुझे ओर जीना है जिंदगी का मज़ा लेना है इसी लोक नर्क में
ईश्वर-मानव अब कुछ नहीं हो सकता यमराज ओर दूत रवाना हो चुके हैं तुझे लेने आने
*मानव- हे ईश्वर गलती हो गयी माफ कर दो मुझे विचारमग्न ओर विचारमय होने में कोई दिक्कत नही है
*ईश्वर-देख अब कुछ नही हो सकता
मानव-लेकिन परमेश्वर ऐसे कैसे नही हो सकता .. आप सब कुछ कर सकते हैं
*ईश्वर- तो सुन तेरे पास एक उपाय है
मानव – वो क्या प्रभू
ईश्वर- वो ये की जैसे सावित्री ने सत्यवान को बचाया था अपने पतित्व से वैसे तेरी पत्नी तुझे बचा सकती है
मानव- लेकिन प्रभु मेरी पत्नी तो सती है लेकिन मैं सत्यवान जैसा सत्यवादी,पत्नीव्रता ,धर्मस्थ पुरूष नहीं हूँ
*ईश्वर- तो फिर आजा बाय बाय bye bye
*nk सनातन