~ Welcome to the Literary World of NK Sanatan (Naresh Kumar Sevak) ~

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NK Sanatan's Writing Treasure

A Treasure of Thoughts, Poems & Prose
Written Since 1990

Naresh Kumar Sevak (NK Sanatan)
“Some books are to be tasted, others to be swallowed, and some few to be chewed and digested.” – Sir Francis Bacon

सनातन नरेश के जहनी सुर

”सनातन नरेश के जहनी सुर !”
1. “दिल में छुपे बेहत्तर इन्सान को बाहर लाना ही जीवन सार है लेकिन असार ही व्यक्ति जीवन से कूच कर जाता हैं।”
2.”धर्म हैं इस दुनिया में फिर भी धरती पर इतना अधर्म सोचनीय शोचनीय बिंदु है।”
3.”सभी धर्मो में पाप मुक्ति के सरल उपाय रास्ते उप्लभ्ध हैं यही अधर्म को और अधर्मियों को बल देता है।”
4.लोग आज को खो कल को जीते हैं और कल कभी आता नही यानी कल को जी कर वाकई वे काहा जीते हैं ?”
5.गरीब हमेशा आज में जीता है और मरने को वो इताना वजन नही देता और रसूख कल के लिए जी आज में गरीब ही मरता है।
6.”आज को बर्बाद कर कल में जीना नादानी है क्योकि आज जो गया वो गया और मुर्दा भी कभी कोई जिया है ।”
7.लोग आज को कठिन बना कल की चिंता करते हैं उसमे कुछ कल को पा लेते हैं लेकिन आज को मार के उनके पास पछताने को आज नही वो कल जो कभी आज था होता है।’”
8..कुछ मनुष्य बर्तमान को कंगाल बना जीवन संवारते हैं जबकि जिन्दगी के समीकरण हर दिन हर पल बदलते हैं।”
9.मेरा आज इतना खुशहाल नही लेकिन मुझे उसका मलाल नही क्योकि मैने कृतिम खेती नही की जिसमे नीरस स्वाद होते हैं
यानी हमेशा आज में जिए।”
10. क्या आपने उन जनजातियो को देखा है किसी मेले किसी उत्सव में
देखेंगे तो पायेंगे आप कतई नही जी रहे हैं वरन बोझ ढो रहे हैं।”
11. बेशक आप रसूख हैं तो आपकी जिन्दगी में दिखावा ज्यादा है और आम आदमी में हकीकत ।”
12.दर्द से दूर होने की कोशिश में हमने आमोद ओरमोस को जिन्दगी का मकसद क्यों मान किया है।”
13.इक आम आदमी को कभी अलग से आमोद प्रमोद नही ढूंढना पड़ता वो चल रही जिन्दगी में ही उसे जीता है।”
14. महान दंदायन के सिकन्दर से प्रश्नोतर पढो जिंदगी में कोन राजा है और कोन भिखारी समझ आ जाएगा ।”
15.”इक धनि के पास खोने को बहुत कुछ होता है जबकि इक गरीब के पास खोने को कुछ नही।”
16.” मै साधारण कर्म्चारी हु मेरा अधिकारी मुझसे डरता है और उसे डरना भी चाहिए ज्योकी उसके पास खोने को बहुत कुछ है।
17.इक अधिकारी मुझे किसी बात पर अविवेकी और ह्रदयहीन हो कर मुझे नौकरी से निकाल सकता है लेकिन उसे पता होना चाहिए की मै उसे दुनिया से निकाल सकता हु।
18 .कई स्वयम्भू आका भूल जाते हैं की वो भी इक नोकर कर्मचारी हैं क्योकि उनके उपर भी कोई है।”
19.देश का प्रधान मंत्री लोकतंत्र में मात्र इक प्रधान सेवक है जनता उसकी माई-बाप होती है।”
20.अगर मै शिक्षित हु तो शिक्षा मेरे व्यवहार में झलकनी चाहिए महान चाणक्य ने हथियार नही उठाए ठीक महान द्रोणाचार्य ने भी नही जो स्वयम इक महाभारत थे और द्रुपद को मार सकते थे लेकिन ब्रह्मनत्व और पांडित्य ने उन्हें रोक।”
21.मेरे जहन में कई खतरनाक और विषेले विचार पनपे पड़े हैं कब कार्यान्वयन हो कह नही सकता दुश्मन इस बात से जान भी अनजान हैं!”
22.जीवन में दुशमन को 99 बार श्री कृषण ने माफ़ किया शिशुपाल को मै मानव हु 101 बार क्योकि शिक्षा मेरी शक्ति है।
23. मै दुश्मन को 101 बार माफ करता हु लेकिन इसके लिए ये पैमाना है- 50=1
24 .मेरा ये पैमाना खतरनाक हैं दुश्मन मेरे सावधान।
25. गरीब मौत की परवाह नही करता क्योकि जिंदगी उसके लिए बहुत सस्ती हैं।
26.धनि जीवन को रोते हैं मेने कई धनवान गरीबो को देखा है जो इक इक रुपये को रोते हैं।
27. जीवन धनिको के लिए कीमती है बीमा व्यवसाय उन्ही से मुखर हैं।
28 ओषधालय सिर्फ रसुखो के लिए ही होते हैं जहा उसे इलाज से बचाया जाता है और जेब में धन नही तो इस धरती के दुसरे भगवान् डाक्टर उसे उपरवाले के भरोसे छोड़ देते हैं।
28.शिक्षा का अर्थ आज परिवर्तित हो सिर्फ व्यवसाय रह गया है सदाचार का इससे दूर तक नाता नही दिखता जो शिक्षा का मूल उद्देश्य्व। हैं।
nk सेवक”सनातन”

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