बहक नशेमन जहाँ की

बहक नशेमन जहाँ की

“बहक नशेमन जहा की”
नशेमन जहां में हर कोई हैं
बस फर्क इतना है “सनातन”
वो हाला पी के
हम गम पी के
आप मद पीके
कोई रब पी के
कोई गरल पी के
इन सब पेयों में सोचता हूँ
गरल ही पी लू
शिव की तरह
आशुतोष बन जाऊं
अमृत को देवता क्या दानव
सब चाहते हैं
फिर बेचारे निरीह
अह इंसा का बोलो
क्या कुसूर है
आखिर सांसारिक
झंझावात ले जो बैठा है।।
Nk सनातन उदयपुर

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

Leave a Comment

Keep reading

You may also like

मन के मंदिर Hindi

मन के मंदिर

ईंट-पत्थर के मंदिर तो बहुत हैं, पर असली मंदिर तो भीतर है; जहाँ रोज़ सत्य की आरती हो, वहीं ईश्वर बिना बुलाए…

June 25, 2026 Read →
अफलातून दुनियाइ इश्किया Hindi

अफलातून दुनियाइ इश्किया

अफलातून खयाल ऐ सांसारी मोहब्बत अकविताई ये दुनिया अकविता करता हूं यूं तो कई व्याकरण,छंद वृंद , विधाएं ,अलंकार ~ अतुक ये…

December 7, 2022 Read →
धन्यवाद डाक विभाग! Hindi

धन्यवाद डाक विभाग!

★ कहानी शीर्षक : धन्यवाद डाक-विभाग ★ [ कहानी की भूमिका : आज उच्च तकनीकी युग में दुनिया छोटी हो गयी है…

September 8, 2021 Read →