दया के सागर संसार के मालिक
है सर्वशक्तिमान तू दया का अवतार है सारे ग्रंथो का निचोड़ शांति सद्भाव अपनी जिंदगी जीना नैतिक गुणों से लब्ध होना है….तू महा बुद्धिजीवी …चमत्कारी ….
तो ये जो फोटोज है जिसमे शेर निरीह प्राणी का शिकार कर रहा है यानी मार रहा है….जाहिर है आदमी की तरह शौकियाना नही स्वाद के लिए नही ….विवशता वश की शेर के पास और कोई विकल्प नहीं क्योंकि तूने उसका शारीरिक गठन ही ऐसा कर रखा है वरना हजारों प्रकार की वनस्पति और घास फूस फल फ्रूट जैसे हाथी गेंडा खाता है …और महा शक्तिशाली है ….!
मेरा मर्म की तू दयावान है तो हर चीज हर प्रकृति में दया,नैतिकता प्रदर्शित होनी चाहिए थी…यहां तो शिकारी खुद शिकार बन जाता है …
और मृत्यु की महा चाबी तेरे हाथ है …जो आदमी के लिए अबोध प्राणी के लिए असहनीय अस्वीकार्य है लेकिन…
क्या सर्वेश्वर तेरे पास कोई और विकल्प न थे…
शायद तूने ये दुनिया किसी दानवराज को सदा के लिए ठेके दे रखी है चला मेरे नाम से अपने मिश्रण के साथ …!!!
*NK सनातन