छितराये मन के यूं ही कुछ ख्याल !

छितराये मन के यूं ही कुछ ख्याल !

■ छितराये मन के बस यूं ही कुछ ख्याल

★मुस्कराहटों का बाज़ार गर्म है
वजह कुछ भी नहीं है
बस अभियान ओर आंदोलन द्वारा प्रयोजित है
चलो जो भी है सब मुगालते मे ही सही मगर खुश तो हैं !
*nk सनातन
★वो एक अंग्रेज से बात कर इतरा रहे थे और मेरा मज़ाक उड़ा रहे थे कि अरे तुझे अंग्रेजी नहीं आती
मैंने कहा इसमे अपमान की क्या बात है
उस अंग्रेज को अपनी हिंदी भी तो नहीं आती है न !
*nk सनातन
★ जितना बुरा होना था हो गया
सोच कर आश्वस्त थे जिंदगी के इस पड़ाव पर
लेकिन ये जिंदगी भी कहां छोड़ती है मरने से पहले !
*NK सनातन
★प्रशंसा में इतना मज़ा नहीं है जितना आलोचना में है
बस एक बार आलोचनाओं को मन से लेकर देखो !
*nk सनातन
★दो चार अवार्ड्स ओर प्रशंसा के सर्टिफिकेट मिल गए
अखबार की सुर्खियां भी मिली
तारीफ के पूल भी बंधे
आलम अब ये है कि अब चाह – इच्छाये मर गयी है कि की फिर कोई ऐसा
काम करू
की फिर तारीफ़ हो
तालियां गूंजे
बस अब तारीफों से भी मन भर गया !
*nk सनातन
आजकल कुछ नई -नई अजीब सी बीमारियों से शरीर गुलज़ार है
उम्र का तकाज़ा है तो लाज़मी ये भी आईना ऐ जिबदगी ये भी स्वीकार है !
*nk सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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