उबटन माँ शल्य-शिवा अवतार !

उबटन माँ शल्य-शिवा अवतार !

उबटन पार्वती शल्य शिवा अवतार
सिद्धि विनायक गण गणपति अधिराज
लाल बाग के बादशाह तोहे मम प्रणाम
लेखनी के अधिदाता बुद्धि के पर्याय
मात-पिता के परम भक्त कार्तिकेय भ्रात
मूषक में ऐरावत बल भद्र उबटन शक्ति अवतार
जीवन समृद्ध ओ मानवता के तारणहार
प्रथम पूजनीय शिवशक्ति के सूत
नही कोई सानी जब काज करते सब शुभ
माते आज्ञाकारी सर कटवा दिए खुद पिता के शूल
अलख निरंजन निराकार भगवन हे सदाशिव
ये तेरी मानवीय लीला-माया
की शल्य चिकित्सा के लिए हुवे प्रेरित
उसी उदाहरण कृत्य से आज शल्य चिकित्सा चमत्कृत
भगवान राम,कृष्ण हुवे अवतारी
शिव भी शक्ति संग एक प्रयोजन
हुवे संसारी
सांसारिक को ऊपर उठाने कुछ शक्तियां रखी अप्रभावी
पार्वती उबटन नंद को मान नियति सर्वोपरि
कटे सर की जगह धर दिए गज सर विधान की बलि
साल भर में एक बड़ा उत्सव
चलया जिसे बालगंगाधर तिलक
भाव भक्ति संग शक्ति था
एकमेव करने देश जन वो आजादी का जुनून था
परंपरा धरती की अब आकाशी है
गणपति बप्पा के जयकारों से भारत धरा पुलकित है !
*NK सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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