तुम्हारे नाम का दीप

तुम्हारे नाम का दीप

तेरे नाम का एक दीप जलाया,
मन के अँधेरे कोने में रखा;
हवा चली, लौ काँपी पर बुझी नहीं —
भक्ति की बाती कभी छोटी नहीं पड़ती।

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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