लो तंत्र लोक तंत्र
लोकतंत्र में व्यक्ति जन्म से ही कानून जो सीमित हैं ओर नागरिक को जगह-जगह बांधता है, बाध्य करता है (यानी व्यक्ति सिर्फ 30% स्वतंत्रत है लोकतंत्र में) ओर प्रत्येक नागरिक को कर्तव्यों या नीतिनिर्देशक तत्वों के घेरे में बांधता,नियंत्रित करता हैं यानी साफ तौर पर व्यक्ति परोक्ष रूप से गुलाम पैदा होता है क्योकि उसे दुसरो के अधिकारों की भी रक्षा करनी है तो उसे अपनी 70% आजादी त्यागनी पड़ती है। मताधिकार लोकतंत्र की जान लेकिन उम्मीदवार 60/40 के अनुपात में जीतता है यानी 40 % लोगो को अपनी नापसंद को भी बहुमत के गणित पर स्वीकारना पड़ता है। व्यक्ति कैसा भी है यदि बहुमत से है तो स्वीकार करना ही होता है चाहे उसे (बुरे-अच्छे) अच्छे या बुरे , पढ़ या अपढ़ों ने चुना है और उस चुने में चंदन कम चुना ज्यादा होता है ये मैं नहीं इतिहास कहता है !
*nk सनातन