मजदूर दिवस आह या वाह!

मजदूर दिवस आह या वाह!

1मई अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस
【मेरी गद्यात्मक तकरीरि अकविता 】
कार्ल मार्क्स ओर एंजेल ने सर्वहारा वर्ग को जान दी
पूंजीवाद को चुनोति दे श्रमिकों को ऑन दी
हाथोहाथ-रातोरात मझदुर यूनियन बने
ओर मजदूरों की पैरवी करने वाले मजदूर नेता ठने-बने
इससे मजदूरों का तो नही पता लेकिन
शर्तिया यूनियन लीडरों की पौ बारह हुई
कुछ ईमानदार रहे कुछ बिके
लेकिन दोनों ही परिस्थितियों में-2
सिर्फ मजदूर ही पिसे !
मजदूर नेता बिके क्योकि वो खरीदवाने तैयार दिखे
मजदूरों की आहो से उन्हें अपनी वाहे ज्यादा अच्छी लगी
ओर आलम ये रहा कि यूनियन नेताओ के तो बंगलो बने
बच्चे अच्छी स्कूलों में पढ़े
ताकि निश्चित आगे वो मजदूर नहीं बने !
ओर मझदुर आज भी झुग्गी झोपड़ीयो के वही बेचारे रहे !
मझदुर दिवस वैसे भी यूनियन लीडर्स ही चियर्स- उप करते हैं !
बेचारा मझदुर तो छल के आता है
रैलियों में वो खुद के दिए चंदे पोषता है
ओर बस जिंदाबाद कह के खुश हो जाता है !
फिर अगले दिन उसे काम ढूंढ़ना है
या किसी फेक्ट्री में रोज़गाररत है तो
पहले यूनियन नेता को सलाम करना है
जाहिर है मालिक तक उसकी पहुँच नहीं !!!
ओर बात बेचारे-बेबस दिहाड़ी मजदूर वर्ग की
जिनका कोई नेता नही
मालिक भी आज ये कल वो
पारिश्रमिक यानी मजदूरी भी जो मिली
कानून में तो रोज 750 ₹ मजदूरी है
लेकिन भई कौन देता है उन मजलुमो को पूरा श्रम
हाँ मालिक ठेकेदार सब जम के श्रम लेते हैं!!
★nk सेवक “सनातन”

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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