★जन्मदिन लो मैं फिर आ गया आपकी बधाइयां-आशीष लेने★
छोटे थे तो बड़े होने की बड़ी तल्ख थी…
ओर बड़े होने का इंतजार रहता था…
अब बढ़ते-2 इतना बढ़े की लगता है वो भूल थी..
लेकिन यही वक्त का चलन है….
बढ़ने के नाम पर सब घट रहे हैं…..
वक्त की रफ्तार में उम्र है…
बढ़ने के नाम हर कोई घट रहा है….
ओर समीकरण ऐसा माना है कि…
घटने को भी बढ़ना मान सब खुश होते हैं…
होना भी है क्योकि कोई और तोड़ भी तो नही है..
उम्र कोई चंद्रमा की कलाये नहीं …..
की घट -घट के अमावस फिर इकम दूज ओर पूर्णिमा…
जिंदगी के चांद इर उसकी कलाओं में सिर्फ और सिर्फ ……
अमावस आती है आती है…
लेकिन इस अमावस के बाद दैविक उजाला है
क्यो…क्योकि…..
हर कोई उसी उजाले की तरफ बढ़ रहा है
जिसे स्वर्ग कहते हैं..
ओर स्वर्ग का हाँ स्वर्ग की
सबको बड़ी चाह है…
ओर देर-सवेर सबको ये मिलना है…
चलो बढ़ने के नाम पर आज फिर बढ़ गया !!
*nk सेवक ”सनातन”