**सनातन उवाच **
धरनों ,अनशनों ,आन्दोलनो की मार पर
जीतता -हारता जीता अपना देश ,
सिस्टम पर मंत्रणा, ताड़ना -वारना लिए चक्षु आवेश ।
बहस घनी-भारी वो भी नुक्कड चाय थड़ियों पर,
5 ₹ में घण्टो लुटाता, हँसता-गाता रूठता-मनाता बाटता अपना गम-शोक
हर्ष-उल्लास
शिक़वा-शिकायते
अपने -अपने राग अपने-अपने द्वेष
अपनी-अपनी ऊऊ अपनी तर्ज
फक्र ऐ जहाँ कहते हैं जिसे भारत
महान
तेरा -मेरा फिर अपना देश
अपना जहान हिंदी हिंदुस्तान
न तेरा न मेरा- बस या कहो सिर्फ स्वार्थ साधाय अर्ज , मर्ज न फ़र्ज बस हक ओर हक
रंजो गम तेरे, तेरी जाती ,तीन रंग 2 ओर 2 पाँच बनाना मेरा-तेरा-सबका धर्म।
खतरे में है… कहाँ…अपना देश..
बाहरी खतरे पर एक कहाँ
पर एक -मेक एक-मेक
अपना देश भारत देश !
*NK सेवक “सनातन”