***खयाल ऐ दरबदर***
तुम खूबसूरत हो तुमसे सब प्यार करते होंगे
मैं तो मरता हु ओर भी कई मरते होंगे
सब के दिल मे इसी शौक का तुंफ़ा होगा
सबके दिल मे यही अरमा मचलते होंगे
लेकिन
मैन दुनिया की तर्ज से इतर खयाल पाला है
वो ये की
तुम खूबसूरत हो तुम्हे चाहने वाले कई मिल ही जायेंगे
इसलिए मैने सहेली तुम्हारी जो सूंदर नही इतनी
को को
चाहने का ख्याल पाला है
खूबसूरत नही जो इतने
वो भी सिर्फ खूबसूरत ही चाहते हैं
ओर ओसत खूबसूरत को नकारते हैं
खुदा ऐ जान
क्यो ये नादां ऐसा भरम पालते हैं
आईना निहारे वो सच्चाई से
ओर स्वीकारे
खूबसूरती चार दिनों की
मन की खूबसूरती सब स्वीकार।
*इस अकविता को सिर्फ सार्वभोमिक जज्बात समझे
इसका मेरी निजी जिंदगी से कोई सरोकार नही
आपका गर हो तो इत्तफाक समझे
*N K सनातन