इक कवि ने शृंगार सिर्फ़ चखा ,दूसरे ने भरपूर पीया !
*एक कवि ने श्रृंगार रस सिर्फ चखा दूजे ने पिया !*
प्रेम अगन दुनिया का सबसे ज्वलंतशील प्रकति पदार्थ
इसके आगे पिता-माता,भाई-बहन,रिश्ते -नाती
जाति, भाषा,समाज सब बे- बेकार
प्रेम-पंछी या प्रेमी युगल हो जाते उन्नमत्त या के पागल दीवाना
की करते सब प्रकति व्यव्वहारों का प्रतिकार
प्रेम दुनिया की सबसे पावन निश्छल ऊंचाई
लेकिन यही
हाँ यही वो मानवाई की
कि – दो विपरीत लिंगो में जगता वात्सायन
खिलता रति-काम का उपवन,चमन
ये प्रकति कही शादी के नाम वैद्य तो कही लिव इन रिलेशन
कही ये आसक्त प्रेम में महीन
कही देह व्यापार मजबूरी कही शौक
मजबूरी की पालन करना है
कही परिस्थितियों ने थोप दिया है
कही शौक ये की कम समय ,मज़ा भी की रुपया खूब लुटता है !!
खेर ये पृष्ठभूमि सार्वभौमिक सच की
कि दुनिया का कोई भी शख्स न अछूता है
इस शील में कोई शील नहीं-
हर मानव हमाम में नंगा है !!
अब इस ज़रिए बात दो बड़ी शख्सियतों की
दोनो ही नैसर्गिक कवि
प्रोफेसर चंद्रपाल शर्मा विश्वास कुमार जनक
उधर अटल पिता श्रीमान पंडित कृष्णबिहारी वाजपेई –
संस्कृत के विद्वान और शिक्षाविद
की आप शिक्षाविभाग के सर्वोच्च प्रशासनिक ओहदे निदेशक पद शोभे
आप हिंदी -बृजभाषा के सजग कवि ठहरे
कुल सात संतान आपकी- जिसमे अटल आखरी ठहरे
तब परिवार नियोजन या संतानोत्पत्ति रोकने के कारगर साधन न थे-
की हर दंपत्ति के 8-10 बच्चे मामूली या साधारण बात
उधर डॉक्टर चंद्रपाल कुमार के पालक के भी 5 संताने
और दोनों कवि-अटलविश्वास में कि-दोनों
परिवार संतानों में सबसे कनिष्ठ- यानी सबसे छोटे !
नो नॉलेज विदाउत कॉलेज
कहावत बड़ी मशहूर
लेकिन नसीब नहीं होता कॉलेज सबके हुज़ूर
आप अटल कॉलेज पहुँचे
कॉलेज यानी अल्हड़ ,मस्ती ,शौखि ,बांकपन
छबील पन, जवानी की हस्ती
लगे सारा जहां खिलता चमन
चुना जाए कोई फूल मन रमन
जवानी का डीएनए बोलता है
अनायास नैसर्गिक आकर्षण बढ़ता है
की दो जंवा दिल नज़दीक आते
और प्रेम का चमन निखरता है
साथ मे कैरियर को ले भी गाम्भीर्य
की प्रेम जीवित रखना है
तो अध्ययन यानी पुस्तको से भी प्यार बराबर करना है
खेर अटल को भी एक खूबसूरत बाला में प्रेम दिखा
दोनों खिंचे चले गए श्रृंगार पाश में
लेकिन भारत का तब क्या अब भी
रीति-नीतियों में परम्पराओं में झकड़ा
देखा जाता था घर-बार,हैसियत, जाति-बिरादरी,स्वभाव ,आचरण ,खानदान और लड़की-लड़के का चलन ,गृहस्त निपुणता ,व्यावसायिक कौशल और पढ़ाई
तब मिलते सारे गुण फिर बात ज्योतिषाई
की कुंडली मिले तो बात बने
नहीं तो सारे गुण शुन्याई
और लड़की तो राजी -लेकिन पिता प्राण और अमरीशपुरी
की बात ठुकराई
अटल की मन दुनिया चरमराई
और श्रृंगार में रची मन बसी कविताएं
ओझल उकताई
फिर अटल देश भक्ति की तरफ मुड़े और वीर रस की कविता खन काई
ओजस्वी स्वर उन्नत शिल्प भाव शब्द कविता दिलो में छाई
इस कड़ी में प्रेम पीछे छूट गया था
लेकिन मन थी अंगड़ाई
परमेश्वर भी दो सच्चे प्रेमी की आवाज़ सुनता है
आखिर परिस्थितिया ऐसी बन आई
की प्रेमिका थी जो कभी
अपने पति,बेटी खुद अटल घर मन बसी बस आई
अब दोनों के बीच रिश्ता रूहानी या जिस्मानी
ये एक अनसुलझी पहेलाई
यानी निचोड प्रेम की पूर्णाहुति नहीं हुई भोतिकाई
यूं कहें राधाकिशन की ज्यूँ अधूरी अधुराई
उधर विश्वास कुमार के प्रेम चर्चे
वो भी अपनी स्टॉफर दिली सज़दे
दोनों का ग़ज़ब आकर्षण
की विश्वास कुमार
कुमार विश्वास बन गए
उनका श्रृंगार रस आसमा बरसा
की करोड़ो प्रेमियों के दिल झूमे
लेकिन कुमार का प्रेम पूर्ण होता है
क्योकि बॉलीवुड की तर्ज़ की प्रेम दो विपरीत लिंगो में
तो मामला सिर्फ और सिर्फ शादी पर खत्म होता है
औऱ यही सत्य समाज मे पलता और पचता है !!
अब सवाल “सनातन nk ” का की
कौनसा प्रेम महान अमर
पूर्ण या अपूर्ण
तो आइना साफ इस विषय का-
की अधूरा प्रेम राधे -कृष्ण का पूजा जाता अमर दास्ता श्रद्धा विश्वास में
पूर्ण प्रेम यानी भौतिक सच्चाई समाज देह कि आवश्यकता गहराई की याद किया जाता
पूजा नहीं जाता
पूर्ण प्रेम की करोड़ो दास्ताने
लेकिन अपूर्ण प्रेम की न्यूनतम विरल दास्ताने-
की शीरी-फरहाद,लैला-मजनूं, रोमियो-जूलियट, ढोला-मारू,हीर-रांझा,अजातशत्रु-आम्रपाली
और मेनका-विश्वामित्र,दुष्यंत-शकुंतला,
और पावन प्रेम कि पराकाष्ठा
ब्रह्माण्डिय महा प्रेम शिव-शक्ति
या कहे पार्वती-शिवा!!
💐💐☺️💐💐
*nk सनातन