कुछ अधपके खयाल
कुछ अधपके ख्याल
*जब जिंदा ग़ज़ल ही सामने हो ग़ज़ल क्या लिखी जाएगी!
मदहोश हो जायेगे दो तन-बदन रुबाई अपने आप सुर बहायेगी !!
*nk सनातन
कसूरवार बाशिंदों के शहर में मशहूर थे ईमा के लिये !
एक कसूर हम भी कर बैठे उनसे मोहब्बत का इज़हार करके!!
*nk सनातन
मोहब्बत तो खुदाई चीज है !
फिर जाने लोग इसे कुसूर क्यो समझते हैं !!
*nk सनातन
चाहत का ये दस्तूर बदस्तूर बाकमाल जारी रहे
हम राधा-मोहन के देश के है
लैला -मजनूं ,सिरी- फरहाद ओर रोमियो-जूलियट के देश के नही
जहां दो प्रेमी युगल सताए गए हो
*nk सनातन
जिसे कभी वो मिले ही नही लेकिन जिंदगी गुजार दी
मीरा कहते हैं जिसने अप्रतिम अलौकिक प्रेम में भक्ति रमा दी
*nk सनातन
*अधूरा होकर भी जो पूरे से ज्यादा है
राधा-किशन के आगे सब किस्से प्यादा है
*nk सनातन
*सदियों से या जाने कब से मानव देख रहा है आईना
अफसोस अब तलक नही पहचान पाया कि है वो कौन
देख नही पाया जो असल मे दिखाना चाहता है आईना
दर्पण ओर आईने में बड़ा फर्क झूठा है दुनिया का अक्स ओर आईना
*nk सनातन