चलो फिर असभ्य बन जाए !

चलो फिर असभ्य बन जाए !

“चलो आज फिर असभ्य बन जायें !!”
सभ्यता का दावा हम करते दम भरते चोंगा ओढ़ते
बरसो से हर बार जबकि सभ्यता के नाम
कई कई असभ्य हमारे काम
पहले पेट के लिए मारते थे
अब शौक के लिए मारते हैं
चलो अब त्याग दे ये सभ्यता
आओ अपना ले फिर असभ्यता
तो शायद आ जाय फिर असल में सभ्यता
अब मारे हम फिर से सिर्फ पेट के ही लिए
लेकिन विकल्प हैं तो नज़रंदाज़ क्यों न करे
मारना ही तो जंगली पन मारे
कपडे पहन कर भी हम नंगे
भाषा भाषी हो कर भी अभाषी
धर्म रख कर भी हम अधर्मी
सभ्य हो कर क्यों बर्बर
घर होकर भी हम बेघर
सामाजिक होकर भी असामाजिक
हर मोड़ हर पहलु में आर्थिकता ही आर्थिकता
धार्मिक होकर भी ठेठ अधार्मिक
चलो “सनातन” आज फिर
अह ये झूठी सभ्यता का चोंगा उतार फ़ेके
और असभ्य ही हो ले फिर
सभ्यता का विलोम असभ्य
हां अब सभ्यता का पर्याय लगता है
चलो असभ्य हो शब्द कोष में
हां ये जायज संशोधन कर जाए
असल में हकीकत स्वीकार
हां मानव नही आदम ही बन
सभ्यता के इल्जाम से बच जाए ।।
**nk sevak “sanatan”

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

Leave a Comment

Keep reading

You may also like

फ्री(मुफ़्त) हाँ… नहीं ?! Hindi

फ्री(मुफ़्त) हाँ… नहीं ?!

रोटी-कपड़ा-मकान! क्या मुफ्त होना चाहिए ? रोटी ,कपड़ा,मकान या फिर शिक्षा ,न्याय ,इलाज ! ओर क्यो होना चाहिए ? रोटी ,कपड़ा,मकान जीवन…

May 30, 2021 Read →
मनबसिया मोहन से कदम Hindi

मनबसिया मोहन से कदम

मोहन का साया, है मुझे भाया, है क्या रसीला, क्या अजब रसीला, मुरली भी जिसकी, ने लुभाया, ऐसे ब्रज मोहन का साया,…

June 20, 2026 Read →