जगमग लकदक दिवाली

जगमग लकदक दिवाली

जगमग जगमग दीपावली

भारत भाल का उपहार
दिवाली सबसे बड़ा त्योहार
अयोध्या लौटे सियाराम,
धारण धर्म जीत का हार
बड़े आतुर अयोध्या वासी
जिनके घट घट में श्रीराम रासी
सजाए घर द्वार बाजार
मन मंदिर भी बेकरार
थी मावस अंधियारे का राज
जलाए दीप बेशुमार
आतिशबाजी खुशी की काशी
आए श्रीराम ले मन मल्हार
सजे धजे सब मुख मंडल
आभा में रोशनी का राज
घर घर व्यंजन मेवा मिष्ठान्नम थाल थाल
रंग रंगोली मन आंगन
स्नेह मिलन बधाईयो का बंधन वार
चल रही चीर पुरातन
अयोध्या नगरी राज राजेश्वर
विशाल सम्राज्यम आर्यवर्तम चक्रवर्ती सम्राटम
अश्वमेघम सब नृप छत्रप अधिनम
इक छत्र राज्ज्यम प्रजा बड़ी सुख सुखाय
राम राज्यम परम बलम
चारो तरफ खुशियां लहराय
दीपावली चीर पुरातन
भारत भाल सोहाय
*NK सनातन

Naresh Kumar Sevak “Sanatan”

Poet, writer and English teacher from Udaipur, Rajasthan — M.A. in English & Hindi Literature. Writes kavita, geet, ghazal, bhajan, satire and articles in Hindi, English and Gujarati.

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