हिंदू थे हिंदी थी तभी तो मगरिब के लोगो ने
महाभूभी तपोभूमि भारत धरा को हिंदुस्तान कहा
आए कुछ लुटने कुछ राजरजवाडे अधीन करने
लुटने वाले लूट गए कुछ ठहरे बना के अपने
कुछ ने सितम ढाए अस्मतें भी लूटी
आपसी फूट वाले पुरखे मौन देखते रहे
राजा थे तब रजवाड़े कहा रहे थे सोए
इज्ज़ते उनकी सबलाओ की भी लूटी जाने केसे
थी आपसी फूट राज विस्तार की परंपरा
एका नहीं एकता रही बड़ी कमजोरी
सो रहे अधीन जमीदार राजराजवाड़े मिन्नते जी हुजूरी चिरौरी
लेकिन तय जनता से की पूरी वसूली अपने उनके लिए
सो दोहरी आततायाई क्रूरता जनता के हिस्से
वक्त के साए वो छत्रप भी हुवे दास अब फिरंगियों किस्से
कोई कैद कोई पेंशन कोई काला पानी कष्ट धाम
थे छत्रप,जमीदार निशक्त धन बल से
पर धनी रहे तब भी रणबाकुरे शमशीरो भाला बरछी के
रहा धर्म झेलना गोली सदेव फोलादी सीने
उधर अंग्रेज यूनियन जैक बैनर तले बने तकनीकी आयुष के रणी
तोप,बंदूक,गोले और नवांग आयोधो से रहे बड़े शुरी
खरीद किराए के भारतीय टट्टू
किए राज लालच डर दे देश भारत अपने बूते
लेकिन ये निराला आर्यावर्त बना जो हिंदुस्तान
न मुगल न गौरी मंगोल अफगान मिटा सके हिंदू और हिंदुस्ता
नाम दिए गली मोहल्लों बाजार सड़को
हां मुगल मुगलिया अफगान फारस रूतबो
जबरदस्ती भी हुई कहर मौत मोतो के
लेकिन न हिंदू न हिंदुस्ता मिटा
हां पारंपरिक संस्कृति रही जिंदा
कर आत्मसात उस संस्कृति मिश्रण हुवा
आज वो उनके वंशज भारत के मूल वंशज से हुवे घुले
भारत था ही नही थे साम्राज्य और रियाया सूबे
नहीं हुवा कोई इक क्षत्र सम्राट चाहे है अशोक,चंद्रगुप्त श्रीकृष्ण राम के अयोध्याई द्वारिकाधीश किवदंती किस्से
जैसे इंग्लैंड,फ्रांस,जापान के हिरोहितो मसले
लेकिन सत्य यही चोकाता।
की कि आंठसो साल के विषम आक्रांताई राज कुराज के बाद भी
भारत भला लिए हिंदुस्तानी परचम वैसा ही है खड़ा
जैसे आकाश सूरज खड़ा चंद्रकला सा घटा जरूर पर अब भी दमकता चंदा सा
अमर थाती वसुधा भारत की
जो था आर्यावर्त विशाल घना
दुनिया की ये अघोषित पांचवी महाशक्ति
जनसंख्या विशाल इसकी बहादुरी बुद्धिमता के समृद्ध विरल इतिहास से रिसते ।
*Nk सनातन