[29/03, 10:47] Nk Sanatan: एक गरीब के पास रंग वैसे भी कहाँ होते हैं
एक पानी-धूल-मिट्टी ही तो है जो बेमोल है
इसलिए वो भी खेलता है
अपनी दुनिया लेकर
धुलण्डी पानी से
दो-तीन साल पूर्व ” महान भास्कर अखबार ” ने मुहिम चलाई
की पानी की बचत हो
सिर्फ तिलक होली
खेर तिलक मिटाने के
जाएगा तो पानी ही
चाहे थोड़ा ही
उधर गरीबो के रंग और उजाले छीने हैं
डर है कि कही– धूल और पानी भी न छिन जाए …
महत्वाकांक्षी सरकार के दुनियावी कुछ रंग कुछ बदरंग खेल में !
*nk सनातन
[29/03, 11:15] Nk Sanatan: कल रविवार था और होली भी
सोचता रहा कि क्या मनाऊ
ओर दिन निकल गया
चलो होली तो निकल ली फिर 12 माह बाद ही आएगी
लेकिन रविवार तो हर हफ्ते अपनी झोली में हैं
हर हफ्ते मनाएंगे
आज रंगोली है
ओर कौराना तो कब से ही है
जो कइयों को मना चुका है
ओर हम जो हैं मना रहे हैं
ज
हालांकि वो पूरे मूड में है कि
उसके साथ मनाऊ उसके साथ मनाऊ
जो बहुत ज्यादा मस्ती में है
चलो कल छुट्टी नही है
कल सुबह दफ्तर जाना है!!!!!!
*NK सनातन
[29/03, 11:44] Nk Sanatan: [29/03, 10:04] Nk Sanatan: रंग हो या बदरंग जीवन तो जीना होता है
कभी दीवाली तो कभी होली
आईना सब त्योहारों का एक सा होता है !
*रंग दार होली
हुड़दंग धुलण्डी
मस्ती के रंग
शिव की भंग
बस सब कुछ
बम बबम बम
शिव लहरी
[29/03, 10:15] Nk Sanatan: रंग हो या बदरंग जीवन तो जीना होता है
कभी दीवाली तो कभी होली
आईना सब त्योहारों का एक सा होता है !
*रंग दार होली
हुड़दंग धुलण्डी
मस्ती के रंग
शिव की भंग
बस सब कुछ
बम बबम बम
शिव लहरी….!!!
*NK सेवक “सनातन”
[29/03, 10:37] Nk Sanatan: पिछली बार की तरह ही ये होली भी आई है ।
करो… ना दुवा सच्ची की
”करोना” समूल मर
जाइ हो ।।
*NK सनातन