महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर की अपच प्रतिक्रिया
(1975 सनी ने 171 गेंद में मात्र 36 रन अविजित…… तैरता प्रश्न)
इक अपने स्तर के क्रिकेटर मै महान सुनील गावस्कर साब का अनन्य प्रशंसक हूं और इक सलामी बल्लेबाज के बतौर उनको आदर्श और प्रेरक मान इक सलामी बल्लेबाज यानी ओपनिंग बैट्समैन के रूप में अपने स्तर पर
विभिन्न प्लेटफार्म पर क्रिकेट खेला और उनकी लाजवाब, सूक्ष्म और मंझी हुई तकनीक का अनुसरण कर कुछ अपनी विशिष्ठ खब्बू शेली को आत्मसात कर इक सशक्त और मजबूत बल्लेबाज के तौर पर टीम साथियों और प्रतिद्वंदियों के मन में जगह बनाई …..खेर बात मूल मुद्दे की कि सुनील गावस्कर साब ने ऊपर जो बयान ऋषभ पंत बनाम दिनेश कार्तिक और वर्तमान भारतीय क्रिकेटर्स के बारे दिया है की यदि रिस्क (खतरा या जोखिम) नही लेंगे या उठाएंगे तो जीतेंगे कैसे ? निश्चित इक क्रिकेटर विशेषज्ञ, कमेटेटर और पूर्व यानी वेटरन क्रिकेटर रूप में आप का बयान काफी दुरस्त ,तंदुरस्त एवम प्रेरक है । और इस कड़ी में इक मशहूर ” कहावत हिम्मत ऐ मर्द मदद ऐ खुदा” बहुत मायने रखती है । जी हां बिना जोखिम के कोई भी काम कोई भी फतह मुश्किल है ! सुनील गावस्कर जब क्रिकेट खेले अपनी शेली और शर्तों पर खेले उनका ध्येय रहा की हारना नहीं और उनके शिखर के वक्त इक हरफनमौला क्रिकेटर सितारा उभरा जिसे क्रिकेट जगत कपिल देव के रूप में जानता है का मकसद रहा की जितना है यानी दोनो ही क्रिकेटर्स और बतौर कप्तान मूलमंत्र यही रहा और दोनो के मायने एक ही है लेकिन इक परिपक्व और बौद्धिक मनन में गावस्कर साब की सोच में हार की संभावना शून्य क्योंकि उसमे रिस्क फैक्टर शून्य लेकिन कपिल देव की सोच में हार और जीत दोनो की संभावनाएं बराबर और जीते तो वाह और हारे तो मूर्खता। हां अपनी इसी सोच की वजह से कपिल देव को अपने शिखर के दिनों में कलकत्ता टेस्ट में चयनकर्ताओं ने बाहर बिठाया था । और महान गावस्कर ने ओवल टेस्ट,इंग्लैंड में 221 रन की पारी खेली थी तब इक रिस्की आक्रामक शॉट की वजह से वे कवर पर लपके गए और तब भारत मात्र 30 रन जीत से दूर था और पूरे 7 बल्लेबाज बाकी थे और जीत के लिए आंशिक रन जुटने कपिल देव को क्रमोन्नत किया गया लेकिन कपिल ने आते ही उठा के मारा और आसानी से लपक लिए गए और इसके बाद भारत को वो रन जुटने मुश्किल हो गए और भारत जीत से मात्र 9 रन दूर रह गया और मैच ड्रा रहा!!!!
लेकिन मूल विषय ये की सनी साब ने जो बयान अभी आज दिए यदि उनकी आलोचनाओ से भरी घोंघा या जोक चाल वाली 36 रनों नोट आउट वाली पारी हां प्रथम वर्ल्ड कप 1975 में आपकी टीम 360 रन के लक्ष्य के लिए उतरी थी…माना 360 रन 60 ओवर्स तब ये लक्ष्य बड़ा ज्वलंत और विशाल था….भारतीय टीम की बल्लेबाजी बहुत कमज़ोर थी और इक दिवसीय कप का ये पहला बड़ा इवेंट प्रयोगात्मक रूप से…भारत के विकेट इक तरफ से गिरते रहे और जो गिरे वो बहुत धीमे खेले और इक सिरे से गावस्कर विकेट थामे रहे और सपोर्ट की तलाश में थे लेकिन जब तीन विकेट गए तब गावस्कर ने अभ्यास के रूप में लिया और इंग्लैड का जबरदस्त बोलिंग आक्रमण उन्हे आउट नही कर पाया..
पर बात ये की उस नीति से गावस्कर की बैटिंग से बड़ी बदनामी हुई, पलिती, फजीती हुई और काश गावस्कर कुछ रिस्क उठा रन बनाते और साथी बल्लेबाजो को उत्प्रेरित करते ! और अब गावस्कर ऐसा बयान दे रहे है की रिस्क उठाते बगैर जीत मुश्किल है …वाजिब है क्योंकि भारतीय टीम आज के दौर में टॉप 3 टीमों ने एक और पूरी टीम हर डिपार्टमेंट में मजबूत तो रिस्क उठाई जा सकती है अंतिम समय तक….
गावस्कर साब के जमाने में टीम हर विभाग में अशक्त ,कमजोर थी और बल्लेबाजी सिर्फ गावस्कर और विश्वनाथ साब पर निर्भर थी,मोहिंदर अमरनाथ तब पिक्चर में नही थे यानी स्थापित नही थे। अभी अभी भारतीय क्रिकेट टीम अपनी क्षमता का पूरा पूरा प्रदर्शन नही कर पा रही है….धांसू और स्थापित बल्लेबाज सिक्सर किंग रोहित शर्मा की कप्तानी में भारत वर्ल्ड कप T 20 ,2022 यानी वास्तविक रूप से अदत्त यानी पेंडिग 2021में निराशाजनक रूप से कप दौड़ से बाहर हो गया …विराट कोहली अपना सर्वश्रेष्ठ प्रकट कर चुके है और क्रिकेट में पुराने आंकड़े मायने नही रखता हमेशा वर्तमान फॉर्म या लय मायने रखता है ! अब निगाहे ऑस्ट्रेलिया T 20 पर हैं और विश्वास की भारतीय दर्शक निराश नहीं होंगे…चलो आशा पर दुनिया टिकी है वैसे भारतीय क्रिकेटर्स कभी कागजी शेर साबित होते है और फैंस निराश होते है लेकिन कोई फर्क नही उन्हे फीस पूरी देता है BCCI ..
*Nk सनातन