जब तुमने ही दिया है खुद हाथो से अपने बारूद ओर चिंगारी
अब घर पे तुम्हारे फेक पटाखे मना रहा वो दीवाली
तो “सनातन” उसका क्या कसूर
क्यो क्योकि वो जमाने की तर्ज से वाकिफ है
के मजा-2
दूसरे के घर जलाने में ही आता है !
*nk सनातन
*जब खुद तुमने ही थमाए हैं उसे पटाखे ओर माचिस
अब वो फेक रहा है घर पे तुम्हारे मद ऐ सत्ता
तो जाहिर है कसूर उसका नहीं !
*nk सनातन
*जब खुद तुमने ही थमाया है शोर-घर उसे
तो जाहिर है धमाके तो होंगे ही !
*nk सनातन