★★★तेरी वफ़ा सुकूँ मोहब्बत का ★★★
काश के रंग चढ़ा के तुमने
बदस्तूर रंग बदले ना होते
दुनिया के लिए इतनी फिक्र थी तुम्हे
तो बेख़ौब बाहों में सिमटे ना होते
तुम्हारी नजदीकियां अगर अहसास जन्नत का
तो दूरियां अहसास ऐ कुफ्र-जहन्नुम- दोज़ख़ का
सफ़र जिंदगी का
धुप-भरा दूभर हुवा
माना महान कहां मैं भी शेक्सपीयर सा की तरसता रहा
मैं तो महान ख्याय ऐ मिल्टन रखता हूँ
नर्क ही सही नर्क का राजा बन जीता हूँ
बला सी खूबसूरती तू , तेरे जलवे ज्यो फूलों की सेज
रहा कायल दीवाना मस्ताना ज्यो परवाना लौ की बहक
लेकिन जान ऐ मेरी दिलनशी मरा नहीं हूँ
शीशा ऐ दिल उतारा तुम्हे चाहे हूँ घायल
दुनिया की लाश पर तेरी वफ़ा के नाम पर
चमन गुलज़ार रक्खा
लेकिन तुम्हारी उसी वफ़ा से आफरीन
खयाल ऐ सोच
तुम्हे आफताब रूह ऐ खु
कायनात रक्खा
नर्क ही सही राज ऐ मिल्टन नर्क में भी तुम्हे अपना रखा
बेवफ़ा तुम्हे कहना तौहीन पाक-शाद ऐ मोहब्बत की
वो जमाने का दस्तूर था
नहीं खता उसमें वफ़ा ऐ तेरी
तेरी चाहों का असर रहा सदा रूमानी,रूहानी
जिस्म क्या है ढल जाते हैं मर जाते हैं एक दिन
तुमने जो भी दिया कायनात ऐ वफ़ा सजा रक्खा है
इसलिये ऐ मेरे दोस्त मेरे हमदम मेरे हमसाज नाम तेरा मैंने
हर दिल अजीज हर भावना से ऊपर
बस बावफा ख़ुदा रक्खा है
खुदा है की मिला नहीं आज तलक किसी को
फिर भी मानते- झुकते, मानते हैं उसी को
फिर तुम तो मिले भी मुझे
दिल के अरमान जिये
तुमने लिए मुझे
हमसफ़र हमख़याल हमसाया दिलबर मेरे
वजह है यही देखा मैने तुममें
वो सिर्फ एक ओर एक है
जानम मेरे इसलिए नाम तुम्हारा
ख़ुदा हाँ मैंने बस ख़ुदा रख्खा है !
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