★अलौकिक ईश्वरीय आकाशवाणी लोकाचार हेतु★
(व्यंग्य रामबाण विधा) आकाशवाणी ईश्वर की जो सारी दुनिया मे गूंजती है—
हे मानव सुन….
आज रात 00:00 से सब शून्य हो जाएगा यानी तू सब झंझटों से मुक्त हो जाएगा
कैसे…. तो सुन—
आज रात नए दिन से जैसा कि तूने समय नियोनित AM PM का चक्कर चला रखा है…
*भूख लगना बंद…सिर्फ हवा से पेट भरेगा ओर तू कॉर्बन डाई ऑक्साइड से जिंदा रहेगा क्योंकि धरती के वातावरण में ये प्रचुर है…. यानी आज से सारी दैनिक क्रियाओ का झंझट खत्म यानी प्यास भी नही लगेगी
*भोजन -पानी जो उपलब्ध है खाने पर तुरन्त 5 उल्टियां ओर मौत…
*कपड़ो का झंझट खत्म न गर्मी ,न सर्दी न बरसात होगी….सभ्यता और शर्म के चक्कर मे पहनने की कोशिश की तो शरीर तुरंत भस्म हो जाएगा..
सारे मकान,घर,बंगलो,कोठिया, कॉम्प्लेक्स यानी सभी प्रकार के निवास गायब हो जाएंगे मौसम समशीतोष्ण ओर बसन्त से भी बेहतर रहेगा…
*वाहन ,मोबाइल ,TV सुविधा और अन्य सारी तकनीकी सुविधाएं शून्य हो जाएगी ..
लेकिन इच्छा करने पर इंटरनेट पर उपलब्ध संजय की तरह सब दिखेगा..
ओर आप इच्छा करते ही पक्षी की तरह उड़ के जा सकेंगे..
समुद्र में कोई भी व्यक्ति डूब कर नहीं मरेगा वो मछली की तरह तैर कर रह पाएगा यानी मेढ़क की तरह उभयचर …नभचर भी बना दिया यानी तीनो कर
हॉस्पिटल की जरूरत खत्म कोई भी बीमार होगा ही नही..
बच्चे गांधारी जी और कुंती जी की तरह महायोगी नागा बाबाओ के वरदान से होंगे …लेकिन इसके लिए तुम्हे उनके पास जाने की आवश्यकता नही वो स्वयं आएंगे आशीर्वचन देने..
*यानी आज से आप किसी को भी कोसियेगा मत जीडीपी पीडीपी जो तुमने बना रखे हैं सब दुखड़े आहे खत्म..
सरकार हा सरकार का क्या लेकिन ये सिस्टम रहेगा क्योंकि टाइम पास करने के लिए कुछ तो होना चाहिए न मानव तुम्हारे पास
लेकिन भगवान हम जावेरियो के व्यापार का क्या…..
ईश्वर- सब श्रृंगार खत्म इन हीरे-मोती सोने चांदी से ओर इनके आभूषण से बदबू आएगी..
तो फिर प्रभु—–
लोहे के आभूषण पहन सकेंगे
जय हो प्रभु… लेकिन सुन ख़ुश होने की जरूरत नही…
क्यो प्रभु ……?
क्योकि मुद्रा विनिमय चलन प्रथा सिस्टम सब खत्म……
एक मानव — प्रभु ऐश ओ आराम और लालच तो रहेंगे न …
ईश्वर– दुष्ट मानव तेरी इस प्रकुति से मुझे एक खतरनाक महामारी कोरोना से 10 गुना भारी लागू करनी पड़ेगी तभी तुझे अक्ल आएगी
मानव– नहीं, नहीं भगवन नही क्षमा क्षमा मम क्षमाम….
ईश्वर– तो फिर ठीक है ओझल होता हूं तथास्तु!!!!!
*NK सेवक ”सनातन”